पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करें
नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में 50% वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, आज तक के इतिहास में भाजपा इस आंकड़े को कभी छू नहीं पाई है। विधानसभा चुनावों में भी नहीं। दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा चुनावों में गुजरात की जनता ने चार बार किसी पार्टी को आधे से ज्यादा वोट दिए। मगर हर बार यह पार्टी कांग्रेस रही।
कम वोट प्रतिशत में भी ज्यादा सीटें ले आती है भाजपा
- लोकसभा चुनाव 1996 में कांग्रेस को 28.80% वोट, 140 सीटें मिली। जबकि, भाजपा काे 20.29 फीसदी वोट और 161 सीटें मिली थी।
- लोकसभा चुनाव 1999 में कांग्रेस को 28.30% वोट, 114 सीटें मिली। जबकि, भाजपा काे 23.75 फीसदी वोट और 182 सीटें मिली
- 2014 के बाद 14 राज्यों में भाजपा का वोट शेयर घटा है। 9 राज्यों में बढ़ा। जबकि, कांग्रेस का वोट शेयर 10 राज्यों में बढ़ा है। 13 राज्यों में घटा है।
ज्यादा वोट शेयर का मतलब ज्यादा सीट नहीं
4.1% वोट शेयर के साथ 2014 लोकसभा चुनाव में बसपा तीसरी पार्टी रही, मगर उसे एक भी सीट नहीं मिली। उसके 34 उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे। जबकि, 3.8% वोट से टीएमसी ने 34, 3.3% वोट के साथ अन्नाद्रमुक ने 37, 1.7% वोट से बीजद ने 20 सीटें जीती थीं।
विधानसभा चुनाव
कर्नाटक: हाल ही में कांग्रेस को भाजपा से 26 सीटें कम मिलीं। मगर उसे वोट 6 लाख ज्यादा मिले।
बिहार: 2015 में राजद 80 सीटें जीतकर पहले नंबर पर थी, मगर वोट शेयर 18.4% था। सबसे ज्यादा वोट शेयर 24.4% भाजपा का रहा था। जबकि भाजपा को सीटें 53 ही मिली थीं। सीटों के मामले भाजपा तीसरे नंबर पर रही।
इन पार्टियों को मिले हैं 50% से ज्यादा वोट
विधानसभा में 41 बार पार्टियों को 50% से ज्यादा वोट मिले हैं। 30 बार कांग्रेस को मिले। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, सिक्किम संग्राम परिषद, आम आदमी पार्टी, जनता दल, नेशनल काॅन्फ्रेंस, जनता पार्टी, तेलुगुदेशम को 50% से ज्यादा वोट मिले हैं।
पार्टी की मान्यता वोट शेयर पर निर्भर
राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता तब मिलती है, जब लोकसभा या विधानसभा के आम चुनावों में पार्टी को 4 अथवा अधिक राज्यों में 6% मत प्राप्त हों। राज्यस्तरीय दल के रूप में मान्यता तब मिलती है, जब पार्टी विधानसभा के आम चुनावों में 6% वोट प्राप्त करता है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.