संपादकीय

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महाभारत 2019: लोकसभा चुनाव में घर वापसी को मुद्दा बनाएगी भाजपा, कश्मीरी पंडितों को घर के साथ 21 लाख रु. देने की तैयारी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 62 हजार कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर देश के अन्य भागों में रह रहे हैं।

Danik Bhaskar

Jul 14, 2018, 08:32 AM IST
विस्थापित कश्मीरी पंडितों की विस्थापित कश्मीरी पंडितों की
  • केंद्रीय मंत्री ने कहा- कश्मीरी पंडितों के लिए 650 मकान बनाने का काम पूरा
  • दिल्ली में 14 सितंबर को रैली करेंगे देशभर के विस्थापित कश्मीरी पंडित

नई दिल्ली. केंद्र सरकार कश्मीरी पंडितों को घर वापसी कराने जा रही है। सरकार आगामी लोकसभा चुनाव में घर वापसी को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए घर बनाने का काम शुरू हो गया है। सरकार इनके लिए क्लस्टर आधारित मकान बनाएगी। इन क्लस्टरों में अन्य समुदाय के लोगों को रहने की इजाजत नहीं होगी। ये क्लस्टर घाटी की चारों दिशाओं में बनाए जाएंगे। कश्मीर में हालात स्थिर होते ही सरकार घर वापसी पैकेज का ऐलान कर सकती है। घर वापसी वाले प्रति परिवारों को 21-21 लाख रुपए देने की भी योजना है, ताकि वे फिर से कश्मीर में अपना कारोबार खड़ा कर सकें। गृह मंत्रालय अक्टूबर तक पैकेज देने की घोषणा कर सकता है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 62 हजार कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर देश के अन्य भागों में रह रहे हैं। सरकार के रुख को देखते हुए कश्मीरी पंडितों ने भी लामबंदी शुरू कर दी है। इनसे जुड़ी कश्मीरी समिति दिल्ली में 14 सितंबर, 2018 को देशभर के विस्थापित पंडितों की रैली करने जा रही है, ताकि सरकार के सामने अपनी मांगें रख सकें।

'650 मकान बनाने का काम लगभग पूरा': कश्मीरी पंडितों के दर्द की चर्चा भाजपा के वरिष्ठ नेता अब खुलकर करने लगे हैं। 22 जून को कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली ने ब्लॉग में लिखा था कि सभी कश्मीरी पंडितों को कश्मीर छोड़ना पड़ा। कश्मीरी युवाओं को नौकरी एवं पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ा है। गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने बताया कि विस्थापित कश्मीरी पंडित भी घर वापस जाना चाहते हैं। वापसी के लिए मकान बनाने का काम शुरू हो गया है। 650 मकान बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। हालांकि, उन्होंने पूरी योजना का खुलासा करने से इनकार कर दिया। उधर, विस्थापित पंडितों ने बताया कि प्रति परिवार 21 लाख रुपए की रकम कम पड़ सकती है। हालांकि, सरकार डिस्ट्रेस सेल लॉ के तहत उनकी जमीन वापस दिला सकती है।

पंडितों की 4 प्रमुख मांगें

1. केंद्र सरकार सम्मान और सुरक्षा के साथ उनका पुनर्वास करवाए।

2. ओवर एज के लिए अलग से पैकेज व पॉलिसी हो।
3. 1990 से अब तक हुई कश्मीरी पंडितों की हत्याओं की एसआईटी जांच हो।
4. साउथ कश्मीर के पनुन कश्मीर में रहने के लिए अलग से जगह मिले।

कश्मीर के इन इलाकों में बनेंगे मकान: घाटी के दक्षिणी इलाके अनंतनाग, उत्तरी इलाके बारामुला और कुपवाड़ा में क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। पूर्वी एवं पश्चिमी इलाके से लगे श्रीनगर में भी क्लस्टर बनाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, करीब एक साल पहले ही केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार ने घाटी में आठ स्थानों पर क्लस्टर के निर्माण के लिए 100 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली थी।

2008 की 8 लाख की स्कीम इसलिए फेल हुई थी: यूपीए सरकार में 2008 में भी गृह मंत्रालय की तरफ से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की घर वापसी पर लगभग 8 लाख रु. प्रति परिवार देने की स्कीम शुरू की गई थी, लेकिन स्कीम फेल हो गई। सिर्फ 1 परिवार इस स्कीम में शामिल हुआ था। 28 साल पहले विस्थापित एवं कश्मीरी समिति दिल्ली के प्रेसिडेंट विजय रैना ने बताया कि 2008 की स्कीम फेल इसलिए हुई क्योंकि, कश्मीरी पंडित घाटी में अब किसी अन्य समुदाय के साथ नहीं रह सकते। हम उन इलाकों में बसना पसंद करेंगे जहां किसी और की दखलंदाजी नहीं हो।

'कश्मीरी पंडितों का मुद्दा चुनावी नहीं': कश्मीरी पंडितों के लिए संघर्ष करने वाले संगठन 'पनुन कश्मीर' के राष्ट्रीय संयोजक अग्निशेखर के मुताबिक, "इसे चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है। पिछले तीन सालों से इस सरकार ने पंडितों की वापसी का कोई जिक्र तक नहीं किया। अब उन्हें हमारी याद आ रही है।" वहीं, 'पनुन कश्मीर' के अध्यक्ष अजय चुरंगो का कहना है, "विस्थापन का मसला कोई बाढ़ पीड़ित या भूकंप पीड़ितों की सहायता नहीं है। यह अति गंभीर मसला है, सरकार को इसे चुनावी मुद्दे की तरह नहीं देखना चाहिए।"

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