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डाउनलोड करेंज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
लोकसभा चुनावों में काले धन का मसला चुनावी मुद्दा बना और भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले में विशेष जांच टीम बनाई.
अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एचएसबीसी के स्विस बैंक को लेकर खबरें आई हैं जिसमें भारतीय उद्योगपतियों, राजनेताओं और अन्य लोगों के नाम हैं. हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि इन खातों में जमा धन वैध तरीके से जमा कराया गया है या फिर काला धन है.
अगर ये मान भी लिया जाए कि इन बैकों में या अन्य बैंकों में काला धन जमा है तो क्या उसे वापस लाना कितना आसान है?
संभव होगा धन लाना?काले धन पर विशेष अध्ययन करने वाले भारतीय प्रबंधन संस्थान बैंग्लुरु के प्रोफ़ेसर आर वैद्यनाथन कहते हैं कि काला धन वापस लाने में गंभीरता दिखाई गई तो 5 से 10 साल इसे वापस लाया जा सकता है.
वरिष्ठ अर्थशास्त्री अरविंद विरमानी का तर्क है, \"पहले तो इस मामले में बहुत कम लोग पकड़े जाएंगे, और फिर काला धन वापस आया भी तो इसकी राशि बहुत कम होगी.
वो पूछते हैं, \"बहुचर्चित बोफ़ोर्स मामले में 20-30 साल पहले काफ़ी शोर मचा था, लेकिन एक पैसा भी देश के अंदर वापस आया?\"
प्रोफ़ेसर आर वैद्यनाथन कहते हैं कि जिन लोगों ने विदेशी बैंकों में धन जमा किया है, वे आम भारतीय नहीं हैं. धन जमा करने वालों में देश के बड़े-बड़े नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा बॉलीवुड, मीडिया और स्पोर्ट्स शख्सियतें भी शामिल हो सकती हैं.
सरकार का तर्क था कि दोहरा कराधान बचाव संधि (डीटीएए) की वजह से विदेशी बैंकों में जमा धन के खाताधारकों के नाम उजागर नहीं किए जा सकते हैं.
जबकि साल 2011 की शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर से कह दिया था कि डीटीएए का संबंध खातेधारकों के नाम जाहिर करने से किसी भी तरह से नहीं जुड़ा है.
मौजूदा सरकार कितनी गंभीर?यूपीए सरकार ने इस मामले में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई.
ऐसा प्रतीत होता है कि मौजूदा सरकार इसे उस गंभीरता से नहीं ले रही है जिस तरह से लेने का उसने वादा किया था.
सरकार ने अब सूचना दी है कि ऐसे 60 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है जिनका काला धन विदेशी बैंकों में जमा है और जिनके खिलाफ सबूत जमा कर लिए गए हैं.
लेकिन प्रोफ़ेसर आर वैद्यनाथन कहते हैं कि काले धन का संबंध बार-बार टैक्स से जोड़ा जा रहा है, जबकि इसमें भ्रष्टाचार, ड्रग्स व्यापार, हथियारों की तस्करी, हवाला, चरमपंथ इत्यादि से जुड़े मामले भी हैं.
देश के अंदर काला धन अधिकअरविंद विरमानी कहते हैं सही मायनों में सरकार को काले धन की पहचान करने और उसे वापस लाने में काफी दिक्कत होगी.
उनका दावा है कि विदेशों में जमा काले धन की राशि को बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है जबकि देश के अंदर काला धन उससे कहीं अधिक है.
वे कहते हैं, \"आप भारत में पकड़े जाने वाली कर चोरी को देख लें, विदेशों में इस तरह के जो मामले पकड़े जाएंगे वह घरेलू मामलों की तुलना में काफ़ी कम होंगे.
उनके अनुसार भारत में तो सरकार की अपनी पुलिस है और न्याय व्यवस्था है, इस काले धन पर कोई क्यों नहीं बोलता?\"
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अब जाँच हो रही है और भारत की जनता भी सरकार की हर कार्रवाई पर कड़ी नज़र रखेगी.
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