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डाउनलोड करेंजयपुर. सुजाता और अमितेश तो बानगी हैं। भास्कर को पिछले काफी दिनों से इस तरह की शिकायतें मिल रही थी। मंगलवार को 10 ट्रेनों में भास्कर टीम ने पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर देखने को मिली। रेलवे मैन्युअल के अनुसार हर कंबल की माह में एक बार धुलाई होनी चाहिए, जबकि ज्यादातर ट्रेनों में दो-दो माह में धुलाई हो रही है। पड़ताल में आया कि इनकी दो माह तक धुलाई नहीं हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि उसकी 10-15 दिन में धुलाई होनी चाहिए नहीं तो संक्रमण हो सकता है।
केस 1 :
दिवाली की छुट्टियों के बाद बीकानेर से मुंबई लौट रही डॉक्टर सुजाता पंत के लिए रेलवे का सफर परेशानी दे गया। उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को यात्रा के दौरान थर्ड एसी में मिल इतना गंदा था कि घर पहुंचते ही उन्हें स्किन एलर्जी हो गई। शरीर पर लाल चकते हो गए, कुछ दिनों तक उन्हें तेज बुखार भी रहा। ट्वीट कर रेलवे से शिकायत भी की लेकिन आज तक जवाब नहीं आया।
केस 2 :
15 अप्रैल को इलाहबाद से जयपुर आए अमितेश का स्टेशन पर उतरते ही जुकाम और छींकों से बुरा हाल था। आंखें पानी से लाल हो गई, डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि एलर्जी हुई है। अमितेश ने बताया कि ट्रेन में कंबल ओढऩे के कुछ देर बाद ही उन्हें परेशानी शुरू हुई।
हमने लिनेन की साफ-सफाई से संबंधित व्यवस्था में पहले से बहुत सुधार किया है। शिकायतें भी कम हुई हैं। रेलवे प्रशासन इस दिशा में काफी काम रहा है और भविष्य में इसे और भी बेहतर करने की कोशिश करेंगे। -तरुण जैन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे
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