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30 साल पहले पुलिस अफसर ने बचाई थी सिपाही की जान, पत्नी हुई प्रेरित और तब से ही जुट गईं रक्तदान में

3 वर्ष पहले
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जयपुर. रक्तदान की एक पहल को इन महिलाओं ने बड़ा...बहुत बड़ा कारवां बना दिया। डॉक्टरों के रिजेक्ट करने पर भी रक्तदान की एक जिद कायम रही। एक महिला तो 30 साल से रक्तदान कर रही हैं। ऐसी ही ‘महादान’ करने वाली 71 महिलाओं को स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक ने सम्मानित किया। इन्हें रक्तदान की प्रेरणा और लोगों को प्रोत्साहित करने के तरीके के बारे में भास्कर ने इनसे बात की। आईजी महेंद्र चौधरी की पत्नी मनोज चौधरी बताती हैं कि वो 1988 से रक्तदान कर रही हैं। ये था पूरा मामला...

 

बात तब की है, जब उनके पति कुशलगढ़ में तैनात थे। वहां पर एक कांस्टेबल का एक्सीडेंट हो गया। उसे ब्लड की जरूरत थी पर ब्लड नहीं मिला। पति ने तब पहली बार ब्लड डोनेट किया था। शुक्र था...कांस्टेबल की जान बच गई, तब महसूस हुआ कि रक्तदान हर किसी के लिए जरूरी है। इस घटना के बाद मैं भी नियमित रूप से ब्लड डोनेट करने लगी। समारोह में आईं डॉ. अलका जैन कहती हैं कि उन्हें रक्तदान के लिए हर बार रिजेक्ट कर दिया जाता था। लेकिन तीन साल से ब्लड डोनेट कर रही हैं।

 

नीतिशा शर्मा और जागृति गौड़ 5 साल से रक्तदान कर रही हैं। स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक के 24वें स्थापना दिवस पर रविवार को हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी थे।