मैं से मां तक : एक अनुभव यात्रा, जो किसी भी मां की आपबीती हो सकती है...

अंकिता का एक कहानी संग्रह 'ऐसी-वैसी औरत' आ चुका है और नई किताब में उनका लेखन परिपक्व हुआ है।

Dainikbhaskar.com

Mar 25, 2019, 01:53 PM IST
Book review: Main se Maa tak by Ankita Jain

मां बनने का अहसास हर लड़की के लिए दुनिया में सबसे अनमोल है। उसके जीवन का एक नया पड़ाव इस भूमिका के साथ शुरू होता है, जिसे वह अपने बच्चे के साथ तब तक निभाती है, जब तक वह बच्चा बड़ा न हो जाए और उसे संभालने वाला कोई और न जाए। लेकिन उससे भी पहले शुरूआती 9 महीने इस पूरे उपक्रम से कहीं अलग हैं। हर दिन नया अहसास, नई सीख उसे मिलती है, नए कष्ट उसकी परीक्षा लेते हैं। जितनी शरीर में अंदरूनी हलचल होती है उससे कहीं ज्यादा दिमाग में चलता रहता है। इन तमाम अहसासों को एक किताब की शक्ल दी है अंकिता जैन ने। अंकिता की नई किताब 'मैं से मां तक' एक अनुभव यात्रा है, जो एक मां के पूरे मातृत्व-काल को बयां करती है। इस किताब में वे तमाम अहसास हैं जो गर्भावस्था के पहले दिन से लेकर बच्चे के जन्म तक एक मां महसूस करती है। मां बनने पर औरत के पूरे व्यक्तित्व, सोच और जीवन-मूल्यों में परिवर्तन आ जाता है, एक तरह से उसका अस्तित्व ही बदल जाता है और मां का रूप उसके अन्य सभी अस्तित्वों पर कैसे हावी हो जाता है, अंकिता की किताब बखूबी बयां करती है।

साधारण शब्दों में कहें, तो यह किताब पढ़कर एक मां की उन तमाम दिमागी उलझनों को समझा जा सकता है, जो उसके साथ पूरे समय चलती हैं। घर, पति, सास-ससुर, परिवार, दोस्त, नाते-रिश्तेदार, आस-पड़ोस और खुद मां बनने जा रही उस औरत की आपबीती है यह किताब। दूसरी ओर, अंकिता की इस अनुभव यात्रा का श्रेय उनके बेटे को दिया जाना चाहिए, जिसके आने से जुड़े तमाम अच्छे-बुरे अहसासों को अंकिता ने किताब की शक्ल दी।

अंकिता का एक कहानी संग्रह 'ऐसी-वैसी औरत' आ चुका है और निश्चित ही, नई किताब में उनका लेखन परिपक्व हुआ है। किताब की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें 'मां बनूं या नहीं' की उलझन से लेकर गर्भावस्था से जुड़े अंधविश्वासों, डॉक्टरों की अनकही बातें, गर्भपात, सी-सेक्शन जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन तो है ही, मन की बात भी है जो किताब को अंत देती है। पढ़ने पर आपको यह काफी हद तक स्वयं की आपबीती लगेगी। हालांकि किताब का कवर निराश करता है। इसे और बेहतर और आकर्षक बनाया जा सकता था।

क्यों पढ़ें- मां बनना सिर्फ 9 महीने का शारीरिक श्रम नहीं है, मातृत्व से जुड़ा अहसास भी हैं, जो किताब पढ़कर बेहद आसानी से समझा जा सकता है। मां बनने से पहले पढ़ लें तो मददगार है, बाद में पढ़ें तो वो सहेली, जो सब जानती समझती है।

क्यों न पढ़ें- किताब उनके लिए मददगार है जो या तो मां बनने वाली हैं या फिर मां बन चुकी हैं। अगर आप दोनों में से ही नहीं है, तो ये किताब भी आपके लिए नहीं है।

किताब के बारे में
शीर्षक- मैं से मां तक
लेखिका- अंकिता जैन
प्रकाशन- राजपाल एंड संस
पृष्ठ-126
कीमत- 175 रुपए मात्र
- सभी बुकस्टोर्स व ऑनलाइन उपलब्ध

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