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डाउनलोड करेंपटना. राज्य के दो करोड़ से अधिक बच्चों के लिए इस साल भी समय पर किताबें नहीं छप सकी है। सत्र शुरू होने के एक पखवारा के अंदर सभी बच्चों को किताब उपलब्ध कराने का सरकार का दावा इस साल भी फेल हो गया है। बिना किताब बच्चे स्कूल जा रहे हैं। पिछले साल तो सत्र समाप्त होने के एक माह पूर्व बच्चों को किताब मिली थी। बच्चों को समय पर किताब नहीं मिल पाने पर शिक्षा विभाग ने बच्चों को राशि देने का फैसला किया। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से किताब के बदले राशि देने की अनुमति भी ले ली है। शिक्षा विभाग से राशि आवंटन के बाद बीईपी (बिहार शिक्षा परियोजना परिषद) ने सभी जिलों को 284 करोड़ रुपए भेज दिए गए हैं। लेकिन बच्चों के खाते में राशि भी अभी तक नहीं जा सकी है।
एक तो बच्चों के खाते में राशि नहीं गई है, दूसरी समस्या यह भी है कि बाजार में संख्या के हिसाब से पुस्तक उपलबध भी नहीं है। बिना राशि खाते में गए कोई किताब खरीदना चाहे, तो भी अनुपलब्धता के कारण नहीं खरीद सकता है। हालांकि पिछले साल की तरह इस साल भी कक्षा तीन से आठ तक के बच्चों को पुरानी किताब देने का प्रावधान किया गया था। वार्षिक परीक्षा के समय ही बच्चों से किताब ले ली गई थी। नये कक्षा में आने वाले बच्चों को यह किताब दिया जाना है। हालांकि अभी तक जिलों से रिपोर्ट नहीं आयी है कि कितने बच्चों को पुरानी किताब मिल सकी है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मुफ्त किताब दिलाने का प्रावधान किया गया है।
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