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डाउनलोड करेंगुरदासपुर(पंजाब). सिविल जज (सीनियर डिविजन) के कहने पर नशा छुड़ाओ केंद्र से सिविल अस्पताल भेजे गए 16 में से एक मरीज का शव करीब ढाई घंटे बाद सड़क किनारे मिला। अभी तक पता नहीं चल पाया है कि उसकी मौत कैसे हुई और लाश वहां कैसे पहुंची। हालांकि, जज ने पुलिस से भी रोगियों के साथ रहने को कहा था।
युवक ने की थी इलाज न करवाने की शिकायत
शनिवार को सिविल जज (सीनियर डिविजन) राणा कंवरदीप कौर कलानौर रोड स्थित प्राइवेट तौर पर चल रहे नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र के दौरे पर आई थीं। इस दौरान केंद्र में भर्ती पिंजौर (हरियाणा) के समीर चौधरी ने बताया था कि वह शुगर का मरीज है। उनके कमरों में चूहे हैं। दो बार उसके पैर में चूहे ने काट लिया, इसके बावजूद उसका इलाज नहीं करवाया जा रहा। उनके साथ सही बर्ताव भी नहीं किया जाता। इसके बाद जज के कहने पर सेहत विभाग के अफसरों ने समीर समेत 16 मरीजों को सिविल अस्पताल भेज दिया। लेकिन ढाई घंटे बाद करीब 4 बजे उसका शव सड़क किनारे मिला।
16 रोगी छुड़वाए
नशा छुड़ाओ केंद्र में भर्ती 16 रोगियों ने स्वास्थ्य विभाग को हस्ताक्षर करके मांग की कि उन्हें इस केंद्र से छुटाकार दिलायाए। इस पर सेहत विभाग ने 16 में से 14 रोगियों को गुरदासपुर के सरकारी अस्पताल में बने नशा छुड़ाओ केंद्र में शिफ्ट कर दिया। बाकी रोगियों को उनके परिजन अपने साथ घर ले गए हैं। सुरक्षा का जिम्मा थाना सदर के प्रभारी राजिन्दर कुमार को सौंपा। इनमें से समीर चौधरी की लाश संदिग्ध हालत में देर शाम लावारिस हालत में मिली।
कमरे में बंद मिले रोगी
गुरदासपुर के कलानौर रोड पर स्थित नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र में जांच के दौरान वहां भर्ती रोगी को कमरों में बंद कर बाहर ताले लगे हुए थे। इसके बाद की गई चेकिंग में एक के बाद एक कई कमियां साफ नजर आने लगीं। केंद्र में भर्ती रोगियों से जब उन्होंने बातचीत की तो पता चला कि 1 रोगी को भर्ती करने के लिए 25 हजार रुपए लिए जाते हैं जबकि रसीद सिर्फ 8 हजार रुपए की दी जाती है। इसके अलावा सुविधा के नाम पर कोई ऐसी चीज नहीं मिली जिससे लगे कि रोगी वहां रहना चाहते हों।
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