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90% दिव्यांग बहन के लिए भाई ने मांगी इच्छा मृत्यु, माता-पिता की मौत के बाद सिस्टम से हो गया था परेशान

3 वर्ष पहले
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चित्तौड़गढ़ (राजस्थान). एक रिटायर सरकारी कर्मचारी की बेटी 90% शारीरिक व मानसिक विकलांग और अविवाहित है। माता-पिता की मौत के बाद उनकी जगह ऐसी बेटी पेंशन पाने की हकदार है। इसके बावजूद सरकारी विभागों ने तीन साल से उसकी फाइल अटका रखी है। बहन की सेवा और उसको पेंशन दिलाने के लिए चक्कर काट रहा भाई इतना परेशान हो गया कि उसने बहन की ओर से इच्छामृत्यु की मांग कर दी। ये है पूरा मामला...

 

शहर के प्रतापनगर क्षेत्र निवासी विद्यापति मिश्रा 1996 में राजकीय अध्यापक से रिटायर हुए। परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। बेटी सुनीता 90% मानसिक व शारीरिक विकलांग होने से 45 वर्ष की उम्र में भी अविवाहित है। मिश्रा का 11 नवंबर 2014 को निधन हो गया। पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में उन पर आश्रित यह बेटी पेंशन पाने की हकदार है। बेटा सुधीर ने बहन को पेंशन दिलाने के लिए 2015 में शिक्षा विभाग में अर्जी लगाई। वह पहले भी कागजी कार्रवाई के लिए चक्कर काटता रहा।

 

इस साल 2 फरवरी को कलेक्टर के आदेश पर पेंशन विभाग को संरक्षक प्रमाण पत्र पेश कर दिया गया। फाइल कंपलीट होने के बावजूद उदयपुर पेंशन विभाग द्वारा प्रार्थी को पीपीओ नंबर जनरेट नहीं किए जा रहे हैं। सुधीर मिश्रा का आरोप है कि वह रिश्वत नहीं दे रहा इसीलिए उसे चक्कर कटवाए जा रहे हैं। मिश्रा ने अब पीएम, सीएम को लिखे पत्र में कहा है कि पेंशन विभाग द्वारा विकलांग महिला के प्रति भी जिस तरह संवेदनहीनता बरती जा रही, उससे पूरा परिवार आहत है। सुनीता मिश्रा ने इच्छा मृत्यु की मांग की है।

 

बहन की सेवा में निकल जाता है पूरा दिन, घर का गुजारा कैसे हो  

 

सुधीर मिश्रा ने बताया कि बहन की उम्र 45 साल हो गई पर मानसिक विकास एक, डेढ़ साल की बच्ची जितना ही है। वह स्वयं अपनी दिनचर्या का कोई काम भी नहीं कर पाती। ऐसे में  वह तथा उसकी पत्नी व बच्चे दिनरात उसकी सेवा करते हैं। ज्यादा समय मुझे ही देना पड़ता है। इस कारण वह खुद कोई स्थायी रोजगार नहीं ढूंढ पाया। पुश्तैनी मकान होने से एक फ्लोर पर मिश्रा परिवार रहता है। एक फ्लोर किराए पर दे रखा है। किराए व सुधीर मिश्रा के एक बेटे के प्राइवेट जॉब से जैसे-तैसे घर खर्च चल रहा है। बहन की पेंशन चालू हो जाए तो परिवार को मदद मिलेगी।

 

यह है नियम

 

पेंशनर समाज के जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण दशोरा ने बताया कि राज्य के सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को भी पेंशन प्राप्त होती है। पत्नी की मृत्यु के बाद अगर परिवार में कोई बेटी अविवाहित व विकलांग हो तो पिता की पेंशन पाने की हकदार होती है। राज्य सरकार के नियमानुसार उसे पेंशन मिलनी चाहिए।