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डाउनलोड करेंलखनऊ. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तरप्रदेश राज्य सम्पति अधिकारी द्वारा नोटिस जारी करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सरकारी बंगला खाली करना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने लिए एक आवास का इंतजाम कर लिया है। मायावती का नया ठिकाना 9, माल एवेन्यू होगा। सोमवार को उनके माल एवेन्यू स्थित आवास पर रंगाई-पुताई का शुरू हो गया है। वहीं, पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपना बंगला खाली करने के लिए औऱ समय की मांग की है।
- मायावती का नया ठिकाना बंगला नंबर-9 उनके वर्तमान आवास 13, मॉल एवेन्यू के सामने और पार्टी कार्यालय 12, मॉल एवेन्यू के पीछे है। बंगले के अंदर रेनोवेशन का काम जोरों पर चल रहा है।
सरकारी बंगले में लगाया गया काशीराम का पोस्टर
-जानकारी के अनुसार, मायावती सरकारी आवास 13, मॉल एवेन्यू का बंगला भी छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही हैं। सोमवार को उनके सरकारी बंगले के सामने कांशीराम विश्रामालय स्थल का बोर्ड लगा दिया गया है। इस बंगले के सामने कांशीराम जी यादगार विश्रामालय स्थल लिखवा कर इस बात की कोशिश जरूर की है कि सरकार इस सरकारी बंगले को ना छोड़े। इस तरह की खबरें आ रही थी कि पीडब्ल्यूडी अपना कैंप कार्यालय मायावती के सरकारी बंगले को बना सकता है।
अखिलेश यादव ने मांगा वक्त
- पूर्व CM अखिलेश यादव ने राज्य संपत्ति अधिकारी से बंगला खाली करने के लिए और समय मांगा है। अखिलेश के निजी सचिव गजेंद्र सिंह ने राज्य संपत्ति अधिकारी को एक पत्र दिया है जिसमें बंगला खाली करने के लिए वक्त की मांग की गई है। राज्य संपत्ति अधिकारी के स्टॉफ ने अखिलेश के निजी सचिव का पत्र रिसीव कर लिया है।
राजनाथ सिंह ने खाली किया आवास
- राज्य सरकार द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास को खाली कर दिया है। वह यहां से गोमतीनगर के विपुलखंड स्थित अपने निजी आवास में शिफ्ट हो गए हैं।
- वहीं, राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश शुक्ल का कहना हैं पूर्व सीएम एनडी तिवारी जी के यहां नोटिस नहीं रीसिव हुआ अन्य सभी पूर्व सीएम ने नोटिस रिसीव कर लिया है।
7 मई को आया था सुप्रीम कोर्ट का आदेश
- बीते 7 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब सरकारी बंगले खाली करने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार का पहले का आदेश रद्द कर दिया है। एनजीओ लोक प्रहरी ने 2004 में याचिका लगाकर इसे रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने 2014 में इस पर सुनवाई पूरी कर ली थी, लेकिन अपना आदेश सुरक्षित रखा था। अब कोर्ट के आदेश के बाद करीब 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों या उनके परिवारों को दो महीने में सरकारी बंगले खाली करने होंगे।
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