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राजस्थान विधान परिषद का संकल्प भारी बहुमत से पारित

अब संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद हो सकेगा विधान परिषद का गठन, 156 में से 152 विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में किया मतदान

Dainik Bhaskar

Apr 18, 2012, 05:47 PM IST
rajastan vidhan parishad passed in vidhansabha



अब संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद हो सकेगा विधान परिषद का गठन, 156 में से 152 विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में किया मतदान



जयपुर. प्रदेश में विधान परिषद का मार्ग प्रशस्त हो गया है। राज्य विधानसभा में बुधवार को विधान परिषद गठन का प्रस्ताव मत विभाजन की प्रक्रिया के जरिए भारी बहुमत से पारित हो गया। माकपा के तीन सदस्यों और निर्दलीय विधायक गोलमा देवी ने इसका विरोध किया। सदन में मौजूद कुल 156 में 152 सदस्यों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में और चार सदस्यों ने विरोध में मतदान किया।


इससे पहले संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विधान परिषद के गठन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कार्य संचालन सूची में शिथिलता देते हुए प्रस्ताव को पहले पेश करने की अनुमति मांगी थी। उपाध्यक्ष ने प्रस्ताव पेश होने के बाद लिखित में मतविभाजन की घोषणा की। इसके लिए सभी सदस्यों को सदन में मौजूद रहने के लिए घंटी बजा कर बुलाया गया। विधानसभा अधिकारियों ने हर सदस्य की सीट पर जाकर उनसे प्रपत्र पर पक्ष और विरोध में हस्ताक्षर करवाए। गणना के बाद उपाध्यक्ष ने परिणाम बताए। इसमें पक्ष में 152 और विरोध में 4 वोट होने की जानकारी दी और प्रस्ताव के पारित होने की घोषणा की।



इससे पहले भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे विधान परिषद का प्रस्ताव पिछली सरकार के कार्यकाल में लेकर आईं थीं।



अब आगे क्या

विधान परिषद का संकल्प पारित होने के बाद इसे संसद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। वहां के दोनों सदनों में संकल्प के पारित होने पर प्रदेश में विधान परिषद का गठन हो सकेगा। विधानसभा के सदस्यों की संख्या के आधार पर विधान परिषद के सदस्यों की संख्या 66 होगी।




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