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जलमहल की पाल पर टूरिस्ट्स ने उड़ाई पतंगें

9 वर्ष पहले
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जयपुर। राजस्थानी लोकगीतों की धुन पर देश=विदेश से आए टूरिस्ट्स और शहरवासियों ने पतंगें उड़ाई। मांजे की ढ़ील पर उड़ान भरती और पेच लड़ती पतंगों का दंगल देखने के लिए टूरिस्ट्स जलमहल की पाल पर जमे रहे। शहरवासियों के साथ मकर संक्रांति पर्व का आनंद उठाते रहे। मौका था, राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित पतंग महोत्सव का। दोपहर बारह बजे जलमहल की पाल शुरू हुए इस महोत्सव में पतंगबाजी और राजस्थानी संस्कृति का नजारा एक साथ देखने को मिले। जहां एक मंच पर लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से लोगों को मनोरंजन कर रहे थे। वहीं, शहर के पतंगबाज ग्रुप बनाकर पतंगे उड़ा रहे थे।

पतंग के दंगल को देखने और अपनी-अपनी टीमों को विजेता बनाने के लिए हौसला अफजाई कर रहे थी। जैसे ही पतंगे कटती वैसे ही वो काटा की आवाज गूंज उठती। जिसकी पतंग कटती वो कुछ देर के लिए मायूस हो जाता। फिर नए जोश के साथ वो पतंगबाज नई पतंग में तंग डालना शुरू देता। कुछ ही मिनट में वह नई पतंग उड़ाता नजर आता। हवा महल और आमेर काइट क्लब के बैनर तले शहर के नामी=गिरामी पतंगबाजों ने पतंगे उड़ाई। लोककलाकारों ने अलगोजा वादन और नृत्य, बहरुपिया, कालबेलिया, भोंपा, कठपुतली, गैर नृत्य, कच्ची घोडी और चकरी नृत्य प्रस्तुत किया।

Photo: Manoj Shrestha