पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • विधानसभा के प्रति घट रही है विधायकों की रुचि

विधानसभा के प्रति घट रही है विधायकों की रुचि

9 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

जयपुर। सदन में मंत्रियों और विधायकों की रुचि कम हो रही है। शून्यकाल और अभिभाषण पर बहस के दौरान सदन में विधायकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस को व्हिप जारी करना पड़ा है। इसके बावजूद सदन में मंत्रियों और विधायकों को मिलाकर सत्तापक्ष की उपस्थिति 25-30 सदस्यों से ज्यादा नहीं रही। हालात यह बने कि राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान जब सत्तापक्ष के मदन प्रजापत अपना वक्तव्य पूरा करने वाले थे तो उप मुख्य सचेतक रतन देवासी को आसन से आग्रह करना पड़ा कि प्रजापत को ही बोलने दिया जाए।


राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस का सोमवार को दूसरा दिन था।इस दिन सत्तापक्ष की ओर से बोलने के लिए केवल चार लोगों के नाम आसन पर दिए गए थे। इनमें करण सिंह ने सत्तापक्ष की ओर से बहस की शुरुआत की। उनके बाद टीकाराम जूली, मेवाराम जैन और मदन प्रजापत ने सरकार का पक्ष रखा। कांग्रेस की ओर से सुबह 11 बजे जारी व्हिप में सभी कांग्रेस विधायकों से कहा गया है कि वे राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस और 27 फरवरी को राज्य सरकार के जवाब के दौरान सभी सदस्य सदन में आवश्यक रूप से मौजूद रहें।


मामला हाईकमान तक पहुंचा: शून्यकाल और अभिभाषण पर बहस के दौरान मंत्रियों और विधायकों की अनुपस्थिति का मामला अब पार्टी हाईकमान तक पहुंच गया है। इससे पहले यह मामला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ध्यान में भी लाया गया। सरकारी मुख्य सचेतक डॉ. रघु शर्मा ने व्हिप जारी करने से पहले इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा की। शर्मा ने कहा कि इससे सदन की गंभीरता कम होती है। पार्टी के सामने भी कभी भी सदन में संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।


मंत्रियों की उपस्थिति भी रही कम: व्हिप जारी होने के बाद भी बहस के दौरान सदन में कैबिनेट मंत्रियों की उपस्थिति भी बहुत कम दिखी। बहस के दौरान सदन में 3-4 कैबिनेट और राज्यमंत्री ही मौजूद रहे। कई बार तो ऐसी स्थिति बनी जब केवल राज्यमंत्री ही सदन में बैठे नजर आए।


और इधर भाजपा में भी ऐसे ही हालात: भाजपा में भी विधायकों की उपस्थिति का मामला सत्तापक्ष की तरह ही रहा। सोमवार को सबसे खास बात यह रही कि जब नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया सदन में आए तो वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी सदन के बाहर चले गए। जब तिवाड़ी सदन में आए तो कटारिया सदन से बाहर चले गए। ऐसा दिनभर में कई बार हुआ।