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अभयारण्यों के कोर एरिया में व्यावसायिक गतिविधियां नहीं : मीणा

9 वर्ष पहले
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जयपुर. प्रदेश के अभयारण्यों के कोर एरिया में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा और सवालों की झड़ी लगी दी। अलग-अलग अभयारण्यों के लिए अलग अलग नियमों को लेकर भी सरकार को सवालों के घेरे में लिया। कुछ सदस्यों ने कोर एरिया में चल रही आरटीडीसी के होटल को छूट देने और निजी होटलों पर पाबंदी को लेकर भी सवाल किए।

मूल प्रश्नकर्ता राजेंद्र राठौड़ ने कोर एरिया जोन में व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में जानकारी मांगी। उनका कहना था कि कितने अभयारण्य हैं और कहां व्यावसायिक गतिविधियां किस नियम के तहत चलाई जा रही है।

उन्होंने जानना चाहा कि क्या रणथंभौर के बारे में कोई प्रस्ताव भेजा गया है। जिसके चलते सवाई माधोपुर जिले का 75 फीसदी हिस्सा वन क्षेत्र में आ जाएगा। सवाई माधोपुर के विधायक अलाउद्दीन ने भी इस मुद्दे पर कहा कि अगर यह लागू हो गया तो 142 गांव और आधे से अधिक शहर इसकी जद में आ जाएगा।

भाजपा के बनवारी सिंघल ने कोर एरिया में बने एक होटल की जांच की मांग उठाई और हेम सिंह ने क्षेत्र में चलने वाले वाहनों पर सवाल उठाया। चंद्र कांता मेघवाल ने दर्रा अभयारण्य को लेकर सवाल उठाया कि खेत में काम निपटाकर इस क्षेत्र से होकर घरों को जाने वाले किसानों से भी अवैध वसूली होती है। भाजपा के ही नंदलाल मीणा ने सीतामाता और फुलवाड़ी अभयारण्यों में लोगों के विस्थापन से संबंध में जानकारी मांगी।

सवालों की झड़ी के बीच वन मंत्री की ओर से सहकारिता मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि सरिस्का कोर एरिया में कोई व्यावसायिक गतिविधियां नहीं हो रही है। वन मंत्री बीना काक अवकाश पर हैं।

मीणा ने कहा कि रणथंभौर बाघ परियोजना में अतिक्रमण के 3,281 मामले सामने आए हैं। इनमें से 91 पर कार्रवाई की गई है। जो काश्तकार, गांव या आबादी अभयारण्यों के क्षेत्र में आ रहे हैं। उनको मुआवजा देकर हटाने की कार्रवाई भी की जा रही है।

एक सवाल पर उन्होंने कहा कि अभयारण्य के कोर एरिया में आरटीडीसी का कोई होटल आ रहा है तो उसे भी हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

गांवों में नियमन के नियम सरल करने की मांग उठी: शहरों की तरह ही गांवों में कृषि भूमि पर नियमन के प्रावधानों को सरल करने की मांग उठी। प्रतिपक्ष के सदस्यों ने इस मुद्दे को लेकर राजस्व मंत्री को सवालों के घेरे में लिया।

मूल प्रश्नकर्ता अजय सिंह ने कहा कि शहरों में 1500 रुपए से घटाकर नियमन शुल्क को 200 रुपए कर दिया और गांवों में नियमन के लिए 4 गुना तक पेनाल्टी ली जा रही है।

भाजपा के देवी सिंह भाटी ने कहा कि शहरों में अतिक्रमण या अवैध कब्जे होते हैं तो नियमन हो जाता है गांवों में खातेदार खेत में मकान बनाता है तो अवैध बता दिया जाता है। कमसा मेघवाल ने कहा कि क्या गांवों में रहना गुनाह हो गया है।


बनवारी सिंघल ने भी इसके सरलीकरण की मांग की। राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने कहा कि उपयोग के परिवर्तन की जानकारी नहीं देने पर ही चार गुना पेनाल्टी ली जा रही है। यह राजस्थान भू राजस्व (कृषि से अकृषि प्रयोजनार्थ संपरिवर्तन) 2007 के नियम 13 में इसका प्रावधान हैं। वैसे 500 गज तक के पट्टे निशुल्क देने का प्रावधान हैं।

बाल श्रमिकों के बकाया की जानकारी नहीं दे पाए मंत्री: पाली के तीन हजार बाल श्रमिकों की लंबे समय से बकाया चल रही राशि के भुगतान को लेकर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री मांगीलाल गरासिया जवाब नहीं दे पाए। भाजपा के ज्ञानचंद पारख के बार बार पूछने के बाद भी राज्य मंत्री लिखित जवाब को ही पढ़ते रहे।

पारख ने कहा कि पाली में 3000 बाल श्रमिक है और इनका पुराना बकाया लंबे समय से बाकी है। जिसे देने के लिए सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं, मंत्री का कहना है कि पाली में सिर्फ 141 बाल श्रमिक ही है।

ओलावृष्टि का मुआवजा: भाजपा के बाबू सिंह राठौड़ ने प्रश्नकाल के दौरान ओलावृष्टि के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरपाई राज्य सरकार के कोष से करवाने की मांग की। उन्होंने सरकार से यह भी सवाल किया कि बीमा के लिए यूनिट ग्राम पंचायत स्तर को क्यों नहीं माना जाता है। जबकि किसानों से बीमा का प्रीमियम ऋण लेने के साथ ही वसूल लिया जाता है।

इस पर आपदा प्रबंधन और सहायता राज्य मंत्री ब्रिजेंद्र सिंह ओला ने कहा कि फसली बीमा योजना के मानदंडों और प्रावधानों में बदलाव का अधिकार केंद्र सरकार को है। उन्होंने कहा कि गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर जोधपुर के 858 गांव अभाव ग्रस्त घोषित किए गए हैं। इसके अनुसार अभावग्रस्त गांवों में चारा डिपो और पशु शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

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