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आरएएस से आईएएस पदोन्नति मामला: केन्द्र व राज्य सरकार से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

8 वर्ष पहले
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जयपुर। हाईकोर्ट ने आरएएस से आईएएस पद पर पदोन्नति मामले में केट (केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण) के 4 अप्रैल 2013 के आदेश को चुनौती देने पर केन्द्र व राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। न्यायाधीश एनके जैन व मीना वी.गोम्बर की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश नन्नूमल व अन्य और जस्साराम चौधरी व अन्य की याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई करते हुए दिया।

गौरतलब है कि केट ने लोकनाथ सोनी व अन्य के प्रार्थना पत्र पर 4 अपै्रल के आदेश से आरएएस से आईएएस पदों को वर्षवार नए सिरे से रिव्यू करने का निर्देश दिया था। साथ ही रिटायर हुए अफसरों के पदों की गणना भी उसी साल में करने का निर्देश दिया था। याचिका में कहा कि आरएएस से आईएएस पद पर पदोन्नति भारतीय प्रशासनिक सेवा (पदोन्नति से नियुक्ति) नियम 1955 के नियम 8 (1) के तहत होती है। जबकि नियम 5(1) के तहत हर साल की पहली तारीख को कमेटी खाली पदों की गणना करेगी और नियम 8 (1) के तहत केन्द्र सरकार राज्य सरकार की अनुशंसा और यूपीएससी की सलाह पर नियुक्ति करेगी।

नियमों के अनुसार जो व्यक्ति राज्य प्रशासनिक सेवा का सदस्य नहीं है वह पदोन्नति का हकदार नहीं है। केट ने आदेश में उन सभी व्यक्तियों का ध्यान रखा जो किसी विशेष साल में चयन सूची में थे। याचिका में कहा कि रिटायर होने से खाली हुए पदों को शामिल नहीं किया जाए। जबकि केट ने माना कि यदि सलेक्शन कमेटी की मीटिंग होती तो वे पदोन्नत होते।

याचिका में कहा गया कि केट का आदेश नियमों के विपरीत है और वह केन्द्र व राज्य सरकार की तरह काम कर रहा है। केट के यहां पेश प्रार्थना पत्र में चयनित या प्रभावित अभ्यर्थियों को न पक्षकार बनाया और न ही उन्हें सुना। उनकी गैर मौजूदगी में उनको सुने बिना दिया आदेश गलत है, इसलिए इस आदेश पर रोक लगाकर इसे निरस्त किया जाए।

मुख्य सचिव व यूडीएच सचिव सहित चार अफसरों को अवमानना नोटिस:
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने बाईस गोदाम सर्किल से दुर्गापुरा तक सड़क की चौड़ाई सौ फीट नहीं करने और महेश नगर रोड पर अतिक्रमण नहीं हटाने पर मुख्य सचिव सीके मैथ्यू, यूडीएच सचिव जीएस संधू, जेडीसी कुलदीप रांका व नगर निगम सीईओ जेएस यादव को अवमानना नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने इनसे पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर अवमानना की कार्रवाई की जाए। न्यायाधीश आरएस राठौड़ ने यह अंतरिम आदेश बृजेन्द्र सिंह की अवमानना याचिका पर बुधवार को दिया।
याचिका में कहा कि हाईकोर्ट ने 4 जनवरी 1991 को रामजीलाल बनाम राज्य मामले में जेडीए की ओर से दायर शपथ पत्र पर बाईस गोदाम से दुर्गापुरा तक पटरी के सहारे-सहारे सौ फीट की सड़क बनाने और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि खुली जगह में पार्क विकसित किए जाएं। इसके अलावा महेश नगर की 80 फीट रोड से भी अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। लेकिन जेडीए व सरकार अदालती आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसलिए इनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।