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डाउनलोड करेंधौलपुर। बाड़ी के गांव धनौरा निवासी रघुवरदयाल मीणा 72 वर्ष के हैं लेकिन पढऩे की ललक अभी कम नहीं हुई है। इन दिनों वे एम.ए. हिंदी की परीक्षा दे रहे हैं। मीणा पढऩे की धुन के बारे में बताते हैं कि उनकी प्राथमिक शिक्षा नहीं हुई थी, लेकिन बाद में उन्हें पढऩे की प्रेरणा जागी तो उन्होंने 1964 में हाईस्कूल का फार्म भरा। दो बार के प्रयास में वे सफल हो गए और उन्होंने एसटीसी की। इसके बाद वे पुलिस विभाग में भर्ती हो गए लेकिन वहां मन नहीं लगा तो शिक्षक बन गए। फिर से उन्होंने पढऩे की ठानी और पुत्र के साथ ही हायर सेकंडरी का पेपर दिया। बाद में बीए किया और बीएड भी कर ली।
मीणा वर्ष 2000 में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हो गए। गत साल उनकी पुत्रवधु अनीता ने एमए का फार्म भरा तो उन्होंने भी एमए करने की ठानी। मीणा अब पुत्रवधु और दोहिती के साथ एम.ए. की परीक्षा दे रहे हैं। मीणा कहते हैं कि पढऩे के लिए उम्र की कोई बाधा नहीं होती और पढऩे से बढ़कर कोई आनंद नहीं है।
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