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जयपुर। राज्यपाल मारग्रेट अल्वा ने राज्य के अधिकारियों की खिंचाई करते हुए कहा कि अधिकारी योजनाएं तो बहुत बनाते हैं। घोषणाएं खूब की जाती हैं, लेकिन उनकी क्रियान्वयन के नाम पर कुछ नहीं होता। राज्यपाल अल्वा सीआईआई और इंडियन ग्रीन बिल्डिंग कौंसिल की ओर से ग्रीन बिल्डिंग एंड रिन्युएबल एनर्जी पर गुरुवार को हुई सेमिनार को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि अधिकारी पर्यावरण को स्वच्छ रखने की बात करते हैं, लेकिन उसके लिए जो आवश्यक तत्व हैं उन्हें भूल जाते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि जब मैं यहां किसी भी झील पर घूमने की इच्छा जताती हूं तो मेरे कर्मचारी यह कहते हुए मना कर देते हैं कि मैडम वहां मत जाना, बहुत गंदी है, दुर्गंध आती है। अब लेक कंजर्वेशन के लिए प्लान किया जा रहा है। यदि स्थानीय निकायों के पास इसके लिए पैसा नहीं है तो केंद्र से इसकी पूर्ति की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि राज्य में जल संरक्षण के बेहतर स्थल मौजूद हैं। पर इनके संरक्षण की जिम्मेदारी सभी लोगों की है। इन्हें साफ रखने और विकसित करने में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। उन्होंने वैज्ञानिकों, टाउन प्लानर और बिल्डर्स का आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर प्राचीन ज्ञान, प्राकृतिक जल संरक्षण और ग्रीन तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल करें।
सेमिनार को सीआईआई सोहराब जी गोदरेज ग्रीन बिल्डिंग सेंटर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एस. रघुपति, एसीएस यूडीएच जी.एस. संधु, प्रमुख सचिव ऊर्जा शैलेंद्र अग्रवाल, कौंसिल के चेयरमैन किशोर खेतान, जेडीसी कुलदीप रांका और सीआईआई चेयरमैन रत्नेश पी. कश्यप ने संबोधित किया।
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