पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंकोटा। पुलिस और प्रशासन का काम नागरिकों को सहूलियत देना होता है न कि उन्हें भोजन और पानी के लिए तरसाना। लेकिन प्रदेश के कोटा जिले में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें स्थानीय पुलिस और कलेक्टर ने वहां काम कर रहे सेमटेल मजदूरों को खाना तो दूर पानी की एक बूंद के लिए तरसता छोड़ दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस दौरान ये अधिकारी खुद जूस और ठंडा पानी पीते रहे जबकि दूसरी ओर मजदूर भूखे-प्यासे तड़प रहे थे।
अब घटना के प्रकाश में आने के बाद राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एचआर कुड़ी ने सेमटेल श्रमिकों को खाने-पीने को तरसाने, महिलाओं एवं बच्चों की पिटाई करने के मामले को लेकर कलेक्टर एवं एसपी को तलब करते हुए 20 दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
सेमटेल श्रमिकों के लीगल एडवाइजर महेन्द्र स्वरूप भार्गव ने 27 अप्रैल को बोरखेड़ा पानी की टंकी पर चढऩे पर पुलिस द्वारा उन्हें पानी और खाना तक नहीं पहुंचने देने तथा श्रमिक परिवारों की महिलाएं एवं बच्चों की पिटाई करने के मामले में परिवाद दर्ज कराया है। आयोग की एकल पीठ ने 2 मई को मामला दर्ज किया है। जिसमें उन्होंने 28 अप्रैल की समाचार पत्रों की कटिंग पेश की हैं, उस कटिंग में लिखा है कि पुलिस अधिकारी जूस और ठंडे पानी की बोतलें मंगाकर छाया में बैठे रहे, जबकि श्रमिकों को खाना और पानी तक नहीं पहुंचने दिया गया।
भार्गव ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को खाने और पानी से वंचित करना न केवल अपराध है, बल्कि मानव अधिकारों का उल्लंघन भी है। इस मामले में आयोग ने 22 मई सुनवाई की तारीख तय की है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.