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यात्रा से पहले अब जिला स्तरीय नेताओं पर रैलियों का दबाव

8 वर्ष पहले
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जयपुर . राजस्थान की सियासत में कांग्रेस और भाजपा की सियासी यात्राओं को लेकर अब दोनों ही दलों के जिला स्तरीय नेताओं पर दबाव और तनाव बढ़ गया है। उन्हें भीड़ जुटाने के लिए हर स्तर पर टार्गेट दिए जा रहे हैं। भाजपा में तो ये टार्गेट पूरा करना टिकट तय होने का भी एक पहलू है। अब कांग्रेस में भी उन सांसदों और विधायकों की परफॉर्मेंस खराब मानी जा रही है, जो भीड़ नहीं जुटा पा रहे हैं।चुनावी माहौल बनाने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के बड़े नेता पूरे प्रदेश में सियासी यात्राएं कर रहे हैं।

कांग्रेस संदेश यात्रा का चौथा चरण शनिवार से अजमेर संभाग में शुरू होने जा रहा है, जहां एक टू वीलर रैली निकाली गई तो दूसरी युवाओं को साथ लेकर। यह इलाका केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट का है और वे अब तक इस यात्रा में गहलोत के साथ नहीं रहे हैं। शनिवार को पहला मौका होगा जब वे यात्रा में साथ रहेंगे। उनके अलावा इस इलाके में राज्य के डेयरी राज्य मंत्री बाबूलाल नागर की प्रतिष्ठा भी दांव पर है।

नागर का कहना है कि भीड़ जुटाने के लिए दबाव इसलिए नहीं है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने योजनाएं ही इतनी अच्छी बनाई हैं कि लोग अपने आप ही खिंचे चले आ रहे हैं। हालांकि बड़े नेता यह बात मानने को तैयार नहीं है कि उन पर रैलियों और भीड़ जुटाने के दबाव है लेकिन सब जानते हैं कि इसी दबाव के तहत उन्हें काम करना पड़ रहा है।

बारां जिले में राज्य सरकार से हटाए गए मंत्री प्रमोद जैन भाया की प्रतिष्ठा दांव पर थीं तो उन्होंने एक बड़ी सभा करवाई। यह इलाका पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके सांसद बेटे दुष्यंतसिंह का सियासी क्षेत्र है। वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा फिलहाल भरतपुर संभाग में चल रही है और उस इलाके में भी भीड़ जुटाने के लिए टिकट चाहने वाले नेताओं पर भारी दबाव है। क्षेत्र के प्रमुख नेता डॉ. दिगंबरसिंह का कहना है कि वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा में सहज रूप से उमड़ी भीड़ है, जो कांग्रेस की विदाई का प्रतीक है।

फोटो: त्रिभुवन