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डाउनलोड करेंजयपुर। माकपा के नेता और घड़साना विधायक पवन दुग्गल राजस्थान पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया। उन्हें नौ साल पहले हुए किसान आंदोलन के दौरान घड़साना के एसडीओ ऑफिस में तोडफ़ोड़ और आगजनी के आरोपों को लेकर पुलिस ने पकड़ा है।
पूर्व विधायक और माकपा नेता हेतराम बेनीवाल ने आरोप लगाया है कि दुग्गल को उस समय कोई जानता-पहचानता तक नहीं था और उस मामले की एफआईआर में एक हजार लोगों को अभियुक्त बनाया गया था, जिनमें से एक भी नामजद नहीं था। बेनीवाल का आरोप है कि पुलिस ने तीन मुकदमे खोल रखे हैं और जिस आंदोलनकारी नेता को चाहे उसे अभियुक्त बनाकर गिरफ्तार कर रही है। उधर पुलिस का दावा है कि दुग्गल नामजद अभियुक्त थे। सीआई़डी सीबी की जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
बेनीवाल के अनुसार दुग्गल उस आंदोलन के प्रमुख नेताओं में उभरे थे, लेकिन वे आगजनी में शामिल नहीं थे। उन्होंने तो इंदिरा गांधी नहर में ज्यादा पानी को लेकर आंदोलन किया था। इस आंदोलन में सभी प्रमुख दल शामिल थे। यही वह आंदोलन था, जिसमें पवन दुग्गल पहली बार एक नेता के रूप में चमके और आंदोलन खत्म होने के बाद अनूपगढ़ पंचायत समिति के प्रधान बने। दुग्गल के प्रधान बनने के बाद माकपा ने उन्हें अनूपगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में पार्टी प्रत्याशी के तौर पर उतारा और वे भाजपा-कांग्रेस के उम्मीदवारों को पराजित करते हुए विधायक बन गए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार दुग्गल के अलावा कुछ और लोग भी इस मामले में नामजद थे, लेकिन उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। दुग्गल अब तक इस प्रकरण में बच रहे थे। माकपा नेताओं ने उनकी गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है और कहा गया है कि दुग्गल और अन्य किसानों ने पुलिस ने इस प्रकरण में झूठा फंसाया था। खुद ही पुलिस ने आगजनी की थी और इसे लोगों पर मंढ़ दिया गया। यह मामला पुलिस उत्पीडऩ की ही एक कहानी है।
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