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डाउनलोड करेंजयपुर। दारा सिंह एनकाउंटर केस के आरोपी निलंबित एडीजी एके जैन की जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट में सीबीआई व बचाव पक्ष की बहस शुक्रवार को पूरी हो गई। न्यायाधीश अजय रस्तोगी ने दोनों पक्षों की बहस को सुनकर फैसला बाद में सुनाया जाना तय किया। अर्जी में जैन ने कहा कि मामले में फोन कॉल डिटेल के आधार पर उनकी भूमिका बता रहे हैं जो कि गलत है। उस समय एसओजी में इंचार्ज आईजी ए.पोन्नूचामी थे, उनके पास दूसरे कई विभाग भी थे। इसलिए उनकी मामले में कोई भूमिका नहीं है।
इसके जवाब में सीबीआई ने कहा कि जैन ने पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ के साथ मिलकर दारासिंह की हत्या का षडयंत्र रचा था और जैन ने अपने अधीन अफसरों को दारासिंह को मारने के लिए नियुक्त किया था। राठौड़ ने 4 अक्टूबर 2006 को जैन को फोन किया तो जैन ने एएसपी अरशद अली के जरिए एसओजी टीम को दारा सिंह की जांच के लिए भेजा। इसकी जानकारी बार-बार जैन राठौड़ को देता रहा। बाद में जब पता चला कि दारा विजय चौधरी के संरक्षण में है तो तत्कालीन डीजीपी को गुमराह कर दारा पर इनाम घोषित करवाया।
बाद में विजय ठेकेदार को पकड़ा गया और उससे दारा को लाने का करार किया। ऐसे में दारा सिंह की हत्या में जैन के शामिल होने से इंकार नहीं किया जा सकता। सुशीला देवी के वकील गजानंद यादव ने कहा कि जैन पिछले कई महीनों से फरार चल रहा है और उनके भय के कारण गवाहों को पुलिस संरक्षण दिया है, ऐसे में जैन को जमानत नहीं दी जाए।
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