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...सोचा न था कि मिलेगी पढऩे की इतनी बड़ी सजा

8 वर्ष पहले
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सिरोही। इस दौर में कोई यह सपने में भी नहीं सोच सकता कि एक बेटी को पढ़ाई करने की इतनी बड़ी सजा भी भुगतनी पड़ सकती है, एक तरफ तो उसे ससुराल वालों ने छोड़ दिया, वहीं दूसरी तरफ जातीय पंचों ने भी उसे समाज से बहिष्कृत कर 12 लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना लगा दिया। मामला किंवरली गांव निवासी सीता रेबारी का है।

सीता ने ससुराल वालों से दसवीं की परीक्षा देने की अनुमति मांगी थी, लेकिन ससुराल वालों ने उसे साफ इनकार कर दिया। वह पढऩा चाहती थी, इसलिए उसने पीहर में रहकर दसवीं की परीक्षा दे दी। इससे खफा ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट की और अपमानित कर उसे घर से निकाल दिया।


दुखी होकर सीता ने वाटेरा निवासी पति लाखाराम पुत्र मोता, सास ओबू देवी, जेठ रूपाराम व ससुर मोता के खिलाफ इस्तगासे के माध्यम से आबूरोड सदर थाने में मामला दर्ज कराया। इससे खफा ससुराल वालों ने जातीय पंचायती बुलाई। पंचों ने पीडि़त युवती का पक्ष लेने के बजाय उसकी पढ़ाई को ससुराल की मर्यादा के खिलाफ करार दिया। पंचों ने सीता के परिवार पर 11 लाख रुपए का आर्थिक दंड लगा दिया। इसके साथ ही एक लाख रुपए सीता को पढ़ाने का जुर्माना भी लगा दिया।


पीडि़त को मिलेगा न्याय
किंवरली निवासी लालाराम रेबारी अपनी बेटी सीता व उसकी पत्नी के साथ मुझे मिला था। उसने उसकी बेटी को ससुराल द्वारा घर से बेदखल करने एवं जातीय पंचों द्वारा 12 लाख रुपए के दंड की शिकायत की है। इसका संबंधित थाने में मुकदमा भी दर्ज है। इस मामले में माउंट आबू एसडीएम को प्रशासनिक सहयोग के लिए निर्देशित किया गया है।

-राजेंद्र कुमार मीणा, एडीएम, सिरोही