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साइंस के बिना समाज की प्रगति नहीं हो सकती

8 वर्ष पहले
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जयपुर। साइंस के क्षेत्र में देशभर में हो रहे कार्यों और इसकी उपलब्धियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को राजस्थान साइंस कांग्रेस की शुरूआत हुई। मानसरोवर स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल में वैज्ञानिक दृष्टिकोण सोसायटी के सहयोग से आयोजित इस तीन दिवसीय साइंस कांग्रेस में राज्यभर के रिसर्च सब्जेक्ट के आधार पर अपना रिसर्च पेपर पढ़ेंगे। वहीं देशभर के साइंटिस्ट साइंस के विभिन्न पहलूओं पर चर्चा करेंगे।

इसी कड़ी में शनिवार को प्रोग्राम की चीफ गेस्ट राज्यपाल मारग्रेट अल्वा ने यूजीसी के चेयरमैन प्रो. वेद प्रकाश को दीपक राठौड़ मेमोरियल नेशनल अवॉर्ड फॉर साइंस कम्यूनिकेशन और साउथ कोरिया के साइंटिस्ट एस. के. चौक को दीपक राठौड़ मेमोरियल इंटरनेशनल अवॉर्ड फॉर साइंस कम्यूनिकेशन से सम्मानित किया।

इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि साइंस के बिना समाज की प्रगति नहीं हो सकती। राज्य में साइंस कांग्रेस की शुरूआत से आमजन में विज्ञान के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सकेगा। प्रोग्राम की अध्यक्षता करते हुए यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. वेदप्रकाश ने एजुकेशन में साइंस एंड टेक्नीकल एजुकेशन की अनिवार्यता पर जोर दिया और हायर एजुकेशन में क्वालिटी और एडवांस टेक्नॉलॉजी के इस्तेमाल करने की बात कही।

2032 तक जनरेट होगी 60 हजार मेगा वाट बिजली :

अक्सर रेडिएशन का नाम सुनते ही लोगों में घबराहट पैदा हो जाती है। जबकि हमारे आसपास के वातारण में भी रेडिएशन ही है। ये बात साइंटिस्ट और डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया में पब्लिक अवेयरनेस डिविजन के हैड स्वपनेश कुमार चौधरी ने कही। उन्होंने कहा कि परमाणु रिएक्टर से पैदा होने वाली एनर्जी पूरी तरह से इको फ्रेंडली होती है क्योंकि इससे कार्बन डाई ऑक्साइड जेनरेट नहीं होती। फिलहाल देश में 20 एटॉमिक पॉवर प्लांट से 4780 मेगावाट एनर्जी पैदा की जा रही है। वहीं 4 रिएक्ट शुरू होने वाले हैं जिसमें राज्य के बांसवाड़ा जिले में भी शुरू होगा। हमारा लक्ष्य 2032 तक 60 हजार मेगावॉट बिजली पैदा करने का है।

परमाणु ऊर्जा ही है बेहतर :

डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी भारत सरकार के साइंटिफिक ऑफिसर सुधीर चंद्र जायसवाल ने बताया कि विंड और सोलर माध्यम से 220 मेगावाट एनर्जी पैदा करने के लिए 200 परसेंट स्पेस की जरूरत होगी। वहीं यह माध्यम मौसम पर निर्भर करता है। जबकि थर्मल पॉवर से ज्यादा मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड जनरेट होती है, जो प्रदूषण के लिहाज से सही नहीं है। ऐसे में एटॉमिक प्लांट ही सबसे कारगर और सही माध्यम है जो सही तरीके को अपनाते हुए बिजली पैदा कर सकता है। वहीं मेडिकल, एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रीज में काम आने वाला अहम एलिमेंट कोबाल्ट भी परमाणु एनर्जी के दौरान ही तैयार होने से इस प्रक्रिया की महत्ता और भी बढ़ जाती है।

Photo : Alok Khandelwal