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रिफाइनरी में देरी : अब तक नहीं हो सका भूमि अधिग्रहण

8 वर्ष पहले
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जयपुर। बाड़मेर में लगने वाली रिफाइनरी के लिए जमीन अवाप्ति की कार्यवाही अब तक पूरी नहीं हो पाई है और न ही जमीन के लिए दरों का निर्धारण नहीं हो पाया। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली सहित कई स्तर पर घोषणा की जा चुकी है कि जून में रिफाइनरी के लिए शिलान्यास कराया जाएगा। इस बीच मुआवजा और पैकेज की मांग को लेकर किसानों का धरना पिछले दो माह से जारी है। किसानों को दी जाने वाली मुआवजा राशि और अवाप्ति कार्यवाही की समीक्षा के लिए अगले दो-तीन दिन में बाड़मेर में बैठक होने की संभावना है।

जोधपुर के संभागीय आयुक्त और दर निर्धारण समिति के अध्यक्ष हेमंत गेरा का कहना है कि अभी मुजावजा राशि की दर तय नहीं हुई है, इसके लिए वार्ता चल रही है। किसी अन्य तरह के पैकेज के बारे में राज्य सरकार के स्तर पर ही फैसला होगा। इस बीच पता चला है कि जन प्रतिनिधियों के स्तर पर मुआवजा 8 से 10 लाख रुपए प्रति बीघा तय कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है।

देरी का असर : जमीन अवाप्ति की कार्यवाही में देरी होती है तो इसके चलते शिलान्यास जून में संभव नहीं होगा। ज्यादा देरी होने पर चुनाव का समय नजदीक आने के चलते आचार संहिता लगने का खतरा रहेगा।

आंदोलन जारी : लीलाला और अन्य गांवों के किसानों का आंदोलन पिछले दो माह से जारी है। किसानों की मांग है कि पुनर्वास की व्यवस्था की जाए और उचित मुआवजा और पैकेज दिया जाए। भाजपा के जिला महामंत्री कैलाश चौधरी का कहना है कि कलेक्टर ने वार्ता के लिए किसानों को सिर्फ एक बार बुलाया। इनकी मांग है कि पहले किसानों के पुनर्वास के लिए इस क्षेत्र के आसपास ही आवासीय कॉलोनी बसाई जाए। उसके साथ ही मुआवजा दिया जाए, जिसके लिए ज्ञापन दिया हुआ है। किसानों के आंदोलन में शामिल लीलाला के मंगलाराम बैरड़ ने कहा कि मांग पत्र दिए एक माह हो चुका है, लेकिन सरकार की ओर से कोई वार्ता नहीं की गई है। उन्होंने दोहराया कि मुआवजा एक करोड़ रुपए बीघा दिया जाना चाहिए।

कितनी जमीन चाहिए : रिफाइनरी के लिए 9610 बीघा (3500 एकड़) जमीन की जरूरत होगी। यह जमीन बाड़मेर जिले के बायतू पंचायत के लीलाला, जांदुओं की ढाणी, सबरामणि गोदारों की ढाणी के साथ मीठिया तलां और लीलासर कोलूं के किसानों की ली जाएगी। इसके लिएए धारा 4 और 6 की कार्यवाही हो चुकी है, लेकिन इसके आगे की कार्यवाही दरों का निर्धारण नहीं होने से अटकी पड़ी है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विशेष प्रयासों के बाद रिफाइनरी की मंजूरी मिल गई। साथ ही रिफाइनरी लगाने वाली कंपनी एचपीसीएल और राज्य सरकार के बीच एमओयू भी साइन हो चुका है। राज्य सरकार की ओर से राजस्थान राज्य पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (आरएससीपीएल) रिफाइनरी के लिए बनने वाली कंपनी में 26 फीसदी की भागीदार होगी।