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कुत्तों के प्रति क्रूर व्यवहार पर अजमेर मेयर व सीईओ को अवमानना नोटिस

8 वर्ष पहले
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जयपुर। हाईकोर्ट ने अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर अजमेर नगर निगम के मेयर कमल बाकोलिया, नगर निगम सीईओ विनिता श्रीवास्तव व स्वास्थ्य अधिकारी प्रहलाद भार्गव को अवमानना के नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने इनसे पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई अमल में लाई जाए। न्यायाधीश वीके माथुर ने यह अंतरिम आदेश एनीमल हेल्थ सोसायटी की सचिव शालिनी की याचिका पर दिया।

याचिका में कहा कि हाईकोर्ट ने 13 जुलाई 2012 के आदेश से अजमेर नगर निगम को निर्देश दिया कि वह कुत्तों के प्रति क्रूरता न बरते और एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग्स) रुल्स 2001 के नियमों का पालन करे। लेकिन निगम ने अदालती आदेश का पालन नहीं किया और न ही नियमों के तहत कोई कमेटी ही गठित की है। निगम कर्मचारी अभी भी कुत्तों को पकडऩे में क्रूरता बरत रहे हैं। इसलिए अदालती आदेश का पालन करवाया जाए।

याचिका में भारत सरकार ने कुत्तों के प्रति क्रूरता रोकने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग्स) रुल्स 2001का हवाला देते हुए कहा था कि स्थानीय निकाय इस कानून का पालन नहीं कर रहे। कानूनी तौर पर कुत्तों की बेहतर देखभाल सहित उनके लिए डॉग्स पॉन्ड बनाए जाने, उन्हें पकडऩे के दौरान कड़े का इस्तेमाल नहीं करने व बर्बरता का व्यवहार नहीं करने का प्रावधान है। लेकिन स्थानीय निकाय प्रशासन इन कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं कर रहा है, लिहाजा निगम को निर्देश दिया जाए कि वह नियम 2001 का पालन करें।

कोर्ट में पेश हुए चिकित्सा राज्य मंत्री राजकुमार शर्मा :
1997 में यूनिवर्सिटी गेट के बाहर रास्ता रोकने के मामले में चिकित्सा राज्य मंत्री राजकुमार शर्मा, पूर्व विधायक रणवीर गुढ़ा व भाजपा युवा नेता अशोक लाहोटी सोमवार को महानगर की साम्प्रदायिक दंगा कोर्ट में पेश हुए। ये तीनों सहित अन्य 13 लोग मामले में बयान देने के लिए पेश हुए थे। कोर्ट ने मामले में बहस 18 मई को तय की।
गौरतलब है कि गांधीनगर के तत्कालीन थानाधिकारी निर्मल सिंह ने 17 जुलाई 1999 को राजकुमार शर्मा सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ यूनिवर्सिटी गेट के बाहर रास्ता रोकने पर मामला दर्ज कराया था। ये लोग एक छात्र दीपक स्वामी से पुलिस द्वारा मारपीट करने के विरोध में सड़क पर रास्ता रोक रहे थे।