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वेस्ट वाटर उपयोग के लिए इजराइल की कंपनी के साथ 19 को एमओयू संभव

8 वर्ष पहले
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जयपुर. वेस्ट वाटर का उपयोग करने में तकनीकी और अन्य सहयोग लेने के लिए इजराइल की कंपनी मेकोरोट डवलपमेंट एंड एंटरप्राइजेज लि. के साथ 19 को एमओयू हो सकता है। यह प्रोजेक्ट कंपनी के सहयोग से स्वतंत्र रूप चलाया जा सकता है या कंपनी को साथ लेकर भी किया जा सकता है। इस बारे में विस्तार से चर्चा 19 मई को कंपनी के बड़े अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में की जाएगी।


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में पिछले दिनों इजराइल गए प्रतिनिधिमंडल ने वेस्ट वाटर के उपयोग के तौर तरीकों को देखा और इसे जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करना तय किया गया था। इस संबंध में मेकोरोट कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मंगलवार को हुई बैठक में वेस्ट वाटर उपयोग को लेकर प्रारंभिक चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता पीएचईडी के प्रमुख सचिव डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने की। कंपनी की ओर से बैठक में एएफआईआई कॉरपोरेट एडवाइजर्स लि. के कार्यकारी निदेशक (इन्फ्रास्ट्रक्चर) हरविंदर सिंह खोखर, निदेशक (प्रोजेक्ट) पुनीत ठाकुर और मेकोरोट के ऑफिस ऑफ इंडिया की कीर्ति गुलाटी मौजूद थीं।
राजस्थान इच्छुक :
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बैठक में कहा कि राजस्थान जयपुर में वेस्ट वाटर के उपयोग को ट्रीट करके कृषि में उपयोग में लेने का इच्छुक है। इस वेस्ट वाटर का उपयोग आसपास के उस ग्रामीण क्षेत्र में उपयोग में लिया जाएगा, जो सूखा प्रभावित है। इस पानी को पाइप के जरिए जरूरत वाले क्षेत्र में पहुंचाया जाएगा। इसका उपयोग ड्रिप सिंचाई के रूप में ही होगा। यह ट्रीटेड वाटर उस किसान को दिया जाएगा, जो इच्छुक होगा। ऐसे किसानों को नकदी फसलें उगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा और उनको मार्केट उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि इस काम से पहले एमओयू के लिए नियम और शर्तों का निर्धारण कर दिया जाए। प्रतिनिधियों ने कहा कि इसके लिए बड़े स्तर पर प्रोजेक्ट तैयार कर लिया जाएगा।
जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट :
बैठक के बाद प्रमुख सचिव डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि जयपुर में पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया जा रहा है। यहां 370 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) वितरित किया जा रहा है। इसमें से 270 एमएलडी पानी रोजाना वेस्ट चला जाता है। अभी ट्रीट करके बागों में सिंचाई होती है, लेकिन व्यर्थ काफी बह जाता है।