जयपुर। अपने देश के लोकतंत्र से प्यार करिए, इसके लिए लड़िए, क्योंकि लोकतंत्र से बेहतर कोई व्यवस्था नहीं। कहा जाता है कि इंग्लैंड डेमोक्रेसी की मां है, लेकिन वो नए जमाने की मां है। लोकतंत्र की असली मां तो हिन्दुस्तान है। हमारे यहां ग्राम सभाएं, पंचायतें कई सदियों से है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन मंगलवार को लोकतंत्र बहस "डेमोक्रेसी इज द वर्स्ट फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट, एक्सेप्ट फॉर ऑल द रेस्ट" में जोशी ने ये कहा।
उन्होंने यह भी कहा- लोकतंत्र की पहचान है जवाबदेही। हम अपने सरकार, अपने मंत्रियों से कभी भी सवाल कर सकते हैं, उनसे जवाब मांग सकते हैं। इसलिए अपनी सारी खामियों के बावजूद लोकतंत्र सबसे बेहतर है। जोशी के साथ भूटान की लिली वांग्चुक, बांग्लादेश के अनीस अहमद, अफ्रीका के पीटर गॉडविन, लेखक पवन वर्मा, इंद्रजीत हाजरा और शाजिया इल्मी ने बहस में भाग लिया।
राजनीति में राज है नीति नहीं
आम आदमी पार्टी से जुड़ी शाजिया इल्मी का प्रश्न था कि संसद में एक तिहाई सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, एक तिहाई शाही पृष्ठभूमि से हैं। राजनीति में केवल राज है नीति नहीं। जबकि राज्य को हटाकर नीति लानी होगी, लोकनीति। बहस के बाद
केजरीवाल के धरने पर सवाल के जवाब में शाजिया ने कहा कि पुलिस की जवाबदेही तय हो इसलिए केजरीवाल धरने पर बैठे हैं। अन्य राज्यों में पुलिस राज्य सरकार के तहत है जबकि दिल्ली में यह केंद्र के अंतर्गत है। दिल्ली में कोई भी अपराध होता है तो लोग हमारी सरकार के पास आते हैं और सवाल करते हैं।
लोकतंत्र में पारदर्शिता का अभाव
लेखक पवन वर्मा ने कहा कि हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी कमी पारदर्शिता का अभाव है। सबसे बड़ी लोकतंत्र की राजनीतिक पार्टियां ही नहीं बताती कि चंदा कहां से आता है। बीस हजार से कम का चंदा बताने की जरूरत नहीं कौन दे रहा है तो पार्टियों के पास ज्यादातर 19,999 रु. आते हैं। पत्रकार व लेखक इंद्रजीत हाजरा के अनुसार लोग अकसर कहते हैं कि अंग्रेजों का राज अच्छा था ट्रेनें समय पर चलती थीं, सब कितना सिस्टेमेटिक था, लेकिन मैं कहता हूं वह समय बहुत बुरा था। कोई सरकार आपकी मूलभूत स्वतंत्रता छीन ले लेकिन ट्रेनें समय पर चलाए, ऐसी सरकार आपका भला नहीं कर सकती।
भारत में ही लोकतंत्र पर बहस
बांग्लादेशी लेखक-पत्रकार काजी अनीस अहमद चीन का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि सब कहते हैं चीन का विकास देखो, लेकिन क्या 1-2 फीसदी विकास दर अधिक पाने के लिए भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का तमगा जाने देगा। ये भारत का लोकतंत्र ही है कि ‘आप’ जैसी पार्टियों का उदय हुआ। बीजिंग में एक पार्टी सिस्टम पर बहस नहीं कर सकते, लेकिन हम जयपुर में लोकतंत्र पर बहस कर रहे हैं, यही लोकतंत्र है। भूटान में एक राजनीतिक दल की अध्यक्ष लिली वांग्चुक अपने देश में लोकतंत्र को राजा की तरफ से दिया तोहफा बताती हैं। 100 साल के राजतंत्र में भूटान ने तरक्की की और लोग इससे खुश थे, बावजूद इसके हमारे यहां लोकतंत्र आया।