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डाउनलोड करेंजयपुर। राज्य विधानसभा में सर्वसम्मति से कैलाश मेघवाल को अध्यक्ष निर्वाचित कर दिया गया। पद संभालते ही मेघवाल ने स्पष्ट किया कि वे अब किसी एक पार्टी के सदस्य नहीं सदन के अध्यक्ष के रूप में काम करेंगे। इसलिए न तो विपक्ष कम संख्या होने पर चिंतित हो और न ही पक्ष अपनी ज्यादा संख्या का फायदा उठाने की कोशिश करे। ऐसे में चाहे पक्ष या विपक्ष का कोई भी विधायक हो, वे विधायी कार्यवाही में पूरा सम्मान करेंगे। प्रदेश नई करवट लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कई तरह की अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आशान्वित है। यह सदन इन अपेक्षाओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति का साधन बने, यही लक्ष्य हो।
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में कहा जाता है-द स्पीकर इज वन हू स्पीक्स मिनिमम। यानी यदि सदस्य विचार रखते समय सदन संचालन की प्रक्रिया, नियम, उपनियम, परंपरा और दिशा-निर्देशों का ठीक से पालन करते हैं, तो आसन की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाता। अवहेलना होने अथवा पालना नहीं होने की स्थिति में ही स्पीकर हस्तक्षेप को बाध्य होता है।
उन्होंने कहा कि वैल में आने की प्रवृत्ति त्यागें। वॉकआउट की आदत से बात का महत्व कम होता है। प्रश्नकाल स्थगित कराने की आदत छोड़ें। लोकतांत्रिक व्यवस्था का वातावरण बनाएं। व्यवस्था तोडऩे की प्रवृत्ति गरिमा के खिलाफ है।
खूब पढ़ें, चिंता न करें
उन्होंने कहा, अध्ययन की आदत डालें। जो साहित्य आपको दिया गया है, उसे ढंग से पढ़ें। विधानसभा के पुस्तकालय का फायदा उठाएं। पढऩे से ज्ञान की वृद्धि होगी, कार्यवाही संचालन में सहयोग मिलेगा। सदन में आपके मुद्दे, बहस के विषय वो हों तो राज्य के सभी क्षेत्रों की चुनौतियों का समाधान करें। कम संख्या पर विपक्ष चिंतित नहीं हो। किसी को शिकायत नहीं दूंगा।
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