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डाउनलोड करेंजयपुर। बजट स्वीकृत नहीं होने से प्रदेश की आंगनबाड़ी केंद्रों में काम कर रही महिलाओं को तीन महीने से वेतन नहीं मिला। ये महिलाएं वेतन के लिए सीडीपीओ ऑफिसों के चक्कर लगा रही है, लेकिन इन्हें संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं मिल रहा। वेतन नहीं मिलने से महिलाओं का घर चलाना मुश्किल हो गया है। प्रदेश में 2 लाख कार्यकर्ता, आशा सहयोगनी, सहायिका का काम कर रही है। ज्यादातर महिला वेतन पर ही आधारित है।
महिलाओं को अक्टूबर, नवम्बर और दिसंबर का वेतन नहीं मिला है। इस दौरान चुनाव के कारण आचार संहिता लग गई थी, इस दौरान बजट स्वीकृत नहीं हो पाया। अब चुनाव होने के एक महीने बाद भी यहीं स्थिति बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ सीडीपीओ और सुपरवाइजरों को समय पर वेतन मिल रहा है।
पिछली सरकार ने एक आदेश जारी कर पहले महिलाओं को वेतन मिले, इसके बाद सीडीपीओ और सुपरवाइजरों जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस आदेश की भी पालना नहीं हो रही है। उधर समेकित बाल विकास सेवाएं के निदेशक वेदप्रकाश का कहना है कि वेतन बजट की वजह से अटका हुआ है। एक-दो दिन में बजट स्वीकृत हो जाएगा। इसके बाद महिलाओं को वेतन जारी कर दिया जाएगा।
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