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चुनाव आयोग की सख्ती ने लोकतंत्र के उत्सव को शोक सभा में बदल दिया : राज्यपाल

8 वर्ष पहले
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जयपुर। राज्यपाल मारग्रेट अल्वा ने कहा कि चुनाव आयोग की सख्ती ने लोकतंत्र के उत्सव को शोक सभा में बदल दिया है। नए नए नियम आ गए हैं। इससे चुनाव प्रचार करना मुश्किल हो गया है। उम्मीदवार का आधा समय तो खर्च को जोडऩे के लिए फाइनेंस मैनेजर और डीएम ऑफिस में ही चला जाता है। एक-एक पैसे का आयोग हिसाब मांगता है। मेरे पास एक शिकायत आई। तमिलनाडु से हॉल सेल में 8 रुपए में टीशर्ट खरीदी, उसका चुनाव आयोग खर्च में 40 रुपए जोड़ता है। अरे भाई इतनी भी महंगाई नहीं हुई।

शनिवार को ओटीएस में राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर हुए राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल मार्गेट अल्वा ने कहा कि मेरा राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव मैनेजर और उम्मीदवार के तौर पर। मैंने कई बार चुनाव आयोग से पंगे भी लिए हैं।

उन्होंने कहा कि आज आप अपने कंपाउंड में पोस्टर तक नहीं लगा सकते। निजी कंपाउंड में उसकी अनुमति से भी पोस्टर लगाते हैं, तो आयोग कहता है कि गलत है। अरे नए चेहरे को तो वोटर देखेगा नए जो सात आठ बार से चुनाव लड़ रहे हैं उनका चेहरा देख देख के तो वोटर वैसे भी पक जाता है लेकिन नए चेहरे के तो पोस्टर लगें। वोटर जानें तो सही कि उनका उम्मीदवार कौन है? यह लोकतंत्र का उत्सव है। एक बार मैंने कहा कि आपने लोकतंत्र के इस उत्सव को शोकसभा में बदल दिया है।

हर मतदाता चुनाव आयोग का एजेंट वोट देकर निश्चिंत न हो जाए।0 बाद में भी देखें आपका एमएलए एमपी क्या कर रहा है। राज्यपाल ने कहा हर वोटर चुनाव आयोग का एजेंट है। हर वोटर अपना कर्तव्य समझे । वोटर वोट देकर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री न समझ लें। वोट देने के बाद अपने जनप्रतिनिधि को देखें। जीतने के बाद क्या एमएलए एमपी घर में सो जाएंगे। वोटर को यह भी समझना होगा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं कैसे काम करती है।

File Photo