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डाउनलोड करेंजयपुर। 14वीं विधानसभा के पहले सत्र में बुधवार को फिर एक बार बजरी मामले पर प्रश्नकाल में गर्मागर्मी हो गई। विधायक रमेश मीणा के टोंक में बजरी खनन के ठेके में अनियमितता सवाल पर यह मामला उठा। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए जब मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि बजरी खनन संबंधी अनियमितताओं को देखते हुए मौके पर निरीक्षण किया गया था। तब ही संबंधित खनन करने वालों को नोटिस दिए गए थे। इस पर रमेश मीणा फिर खड़े हो गए और बोले, नोटिस दिए पर कार्रवाई क्या हुई। इस पर कई अन्य विधायक भी खड़े हो गए और अपनी बात कहते रहे।
प्रद्युम्न सिंह ने कहा कि नोटिस के जवाब में यदि कुछ लोगों पर कार्रवाई होगी तो अच्छा मैसेज जाएगा और अन्य गलत काम करने वालों पर अंकुश लगेगा। क्योंकि जो भी पॉलिसी बजरी को लेकर सरकार लाने वाली है, उसमें समय लगेगा, तब तक ऐसी कार्रवाई प्रभाव डाल सकेगी।
खनन माफिया को पनपने नहीं देंगे
सवालों के जवाब में राठौड़ ने कहा कि खनन करने वालों ने नोटिस के क्या जवाब दिए हैं, उसे पढ़कर जांचा जाएगा कि कौन-कौन दोषी हैं। इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। किसी भी सूरत में खनन माफिया पनपने नहीं दिया जाएगा।
फिर स्थगन प्रस्ताव में भी उठा मामला
जैसे ही प्रश्नकाल समाप्त हुआ और स्थगन प्रस्ताव के लिए अध्यक्ष मेघवाल ने बोलना शुरू किया, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी खड़े हो गए। उन्होंने फिर बजरी का मामला उठाया और कहा इस पर आसन की ओर से आधे घंटे की चर्चा की व्यवस्था दी गई थी। वह चर्चा कब होगी?
उन्होंने नागौर में धरने पर बैठे किसानों का मामला भी उठाया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि निश्चित ही वे इस पर इसी सत्र में चर्चा कराएंगे। अध्यक्ष के जवाब से असंतुष्ट हनुमान बेनीवाल और रमेश मीणा फिर खड़े होकर बोलने लगे।
जरूरी नहीं कि वही जवाब दिया जाए, जो आप चाहें
अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने हनुमान बेनीवाल को कहा कि आप बैठिए। जरूरी नहीं कि सरकार वैसा ही उत्तर दे जैसा आप कहलवाना चाहें। इस पर बेनीवाल बोले, आपके कहने पर मैं रोज ही तो बैठ जाता हूं। तभी किरोड़ी भी खड़े हो गए और कहने लगे। अध्यक्ष जी, आप पर मेरा असर नहीं आना चाहिए। फिर हमें कौन समझाएगा। इस पर मेघवाल ने कहा, असल में मेरी आवाज तेज है। फिर आवेश में आई आवाज से वैसा ही जवाब देने से सदन की रोचकता बढ़ जाती है। हमें प्रेम से विधानसभा को चलाना है। मेरे तेज बोलने से कोई सदस्य यह नहीं समझे कि मैं उसके खिलाफ बोल रहा हूं या विरोध में हूं।
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