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7 वर्ष पहले
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जयपुर। मुझे याद है। दूसरे विश्वयुद्ध का दौर था। राजसमंद या राजसमुद्र झील में रॉयल एयरफोर्स के सी एयरक्राफ्ट उतरा करते थे। झील विशाल थी। इसीलिए उसे राजसमुद्र कहते थे। और अब देखिए। मार्बल स्लरी और अतिक्रमण ने अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कहना है मेवाड़ के पूर्व राजघराने के वंशज अरविन्द सिंह मेवाड़ का। दैनिक भास्‍कर डॉट कॉम पर पहली बार पढ़ें, मेवाड़ के पूर्व राजघराने के वंशज अरविन्द सिंह मेवाड़ की जुबानी राजस्‍थान के विकास की कहानी।
अरविन्द सिंह मेवाड़ कहते हैं कि यह हाल सिर्फ राजसमंद का नहीं, पूरे राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का है। बेढंगे विकास ने यह स्थिति पैदा की। दुनिया भर में राजस्थान की पहचान इसकी संस्कृति, परंपराओं और विरासत की वजह से है। राजे-रजवाड़े इसके पोषक हुआ करते थे। पर अब क्या हो रहा है? न वो नृत्य-संगीत रहा और न खानपान। शादियां डिस्को पार्टी बनती जा रही हैं और परंपराएं खत्म। हमारी अब भी यही कोशिश है कि अपनी संस्कृति और विरासत को इतिहास का हिस्सा न बनने दें। लेकिन सच यह भी है कि हमारी सुनता कौन है?
Note : सभी तस्‍वीरें अरविंद सिंह मेवाड़ की हैं।