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डाउनलोड करेंजयपुर। स्टेशनरी भत्ता ढ़ाई सौ रुपए के भुगतान की प्रक्रिया बदलने के राज्य सरकार के निर्णय पर कर्मचारी उखड़ गए हैं। सरकार ने इस राशि को कार्यालय बजट में जोड़कर कार्मिकों को इसका प्रमाणीकरण कराना जरुरी किया है।
अब कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से इस निर्णय को वापस लेकर स्टेशनरी भत्ता यथावत रखने की मांग की है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह व उपाध्यक्ष विजय उपाध्याय ने बुधवार को मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर अधीनस्थ व मंत्रालयिक कर्मचारियों को दिया जा रहा स्टेशनरी भत्ता यथावत जारी रखने की मांग की।
अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु) के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल ने कहा कि सरकार के इस निर्णय का असर ढ़ाई लाख शिक्षकों पर पड़ा है। सरकार के ऐसे निर्णयों से भाजपा के मिशन-25 के सपने अधूरे रह सकते हैं।
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री शशिभूषण शर्मा ने कहा कि मकान किराया भत्ते व शहरी भत्ते का प्रमाणीकरण नहीं होता तो स्टेशनरी भत्ते के प्रमाणीकरण की भी जरूरत नहीं होनी चाहिए।
राजस्थान राज्य कर्मचारी समन्वय समिति के प्रवक्ता नारायण सिंह ने कहा कि सरकार ने इस आदेश को वापस नहीं लिया तो आंदोलन किया जाएगा। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के अध्यक्ष केके गुघ्ता ने इसे कर्मचारियों के साथ छलावा बताया और कहा कि इसके विरोध में आंदोलन किया जाएगा।
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