जयपुर। साउथ अफ्रिका के शेरों की स्थिति अच्छी नहीं है। फिटनेस में सुधार के लिए अफ्रीकन शेरों को चाइना भेजा जा रहा है ताकि चाइनीज मेडिसीन लेने के बाद उनकी स्थिति बेहतर हो जाए।
यह जानकारी एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट के चेयरमैन लेसवार्ड मार्शिंग ने दी। लेस वार्ड मार्शिंग फियापो की ओर से क्लॉर्क आमेर में चल रही इंटरनेशनल कांफ्रेंस प्रोटेक्शनल एनिमल-2014 में हिस्सा लेने आए हुए थे।
उन्होंने कहा कि साउथ अफ्रिका में आजकल जन्म लेने के तुरंत बाद शेरों को चाइना भेजा जा रहा है। चाइनीज मेडिसीन से शेरों की फिटनेस अच्छी हो पाएगी। ऐसा माना जाता है। यह ट्रस्ट चेरिटी के लिए पहचाना जाता है।
जानवरों की सेवा के लिए यह ट्रस्ट चेरिटी करता है। यह ट्रस्ट अमेरिका और कनाड़ा को सिर्फ ग्रांट नहीं दे रहा है बाकी जानवरों की सेवा के लिए ग्रांट दे रहा है। इंडिया में हाथियों की स्थिति में सुधार के लिए आगरा और बेंगलुरू को ग्रांट दी थी। बस्सी में हैल्पिंग सरफिंग के कैमल रेस्कयू सेंटर प्रोजेक्ट को सपोर्ट किया गया है।
एक डॉग कपल से 66 हजार पप्पीज
वेट्स बियॉड बॉडर्स आस्ट्रेलिया के स्टीवन हीथ ने कहा, दस साल पहले रेबीज को कंट्रोल करने के लिए बडे स्तर पर चैरिटी शुरू की गई थी। इसके खिलाफ लड़ने के लिए इंडिया, फ्रांस और इंग्लैंड में वॉलियेंटर तैयार किए गए थे।
सिक्कम और लद्दाख में गवर्नमेंट की मदद से एंटी रेबीज वैक्सीनेशन किए गए। लोगों में गलत धारणा है कि पप्पी के बड़े होने पर वैक्सीन की जरूरत नहीं है जबकि यह गलत है। इसलिए पप्पीज को भी वैक्सीन लगाए जाने चाहिए।
एक डॉग कपल से दस सालों मे 66 हजार पप्पीज पैदा होते हैं। रेबीज को कंट्रोल करने के लिए वैक्सीनेशन जरूरी है।