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हिंदी दिवस : गुलामी की मानसिकता के कारण अंग्रेजी हावी

7 वर्ष पहले
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शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ(फाइल फोटो)।
जयपुर। भाषा एवं पुस्तकालय विभाग की ओर से रविवार को जवाहर कला केंद्र के रंगायन सभागार में हिंदी दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने हिंदी की वर्तमान दशा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसके विकास के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि भाषा सेवा का माध्यम ही नहीं, बल्कि संस्कारों की द्योतक भी है। अंग्रेजी से काम चलाऊ ज्ञान तो प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन लोगों से संपर्क स्थापित करने के लिए हिंदी ही सर्वोत्तम माध्यम है।
सराफ ने तकनीकी, विज्ञान व वाणिज्य की किताबों के हिंदी वर्जन प्रकाशित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी ही एक मात्र ऐसी भाषा है जो जैसे लिखी जाती है, वैसे ही बोली जाती है। उन्होंने इस बात पर गर्व महसूस किया कि देश के प्रधानमंत्री विदेश जाकर हिंदी में भाषण दे रहे हैं। साथ ही कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उर्दू और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी रोमन में लिखा हिंदी भाषण पढ़ते हैं।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रमुख शिक्षा सचिव पीके गोयल ने कहा कि आज ग्रामीण इलाकों के लोग अंग्रेजी सीखने लगे हैं तो अंग्रेजी भाषा को अधिक कठिन बनाया जा रहा है। ताकि वे अंग्रेजीदां लोगों के बराबर नहीं आ सके। उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर की कि आज भी कोर्ट में सारा काम अंग्रेजी में होता है।
केंद्र सरकार के अधिकांश सर्कुलर अंग्रेजी में आते हैं। मुख्य वक्ता साहित्यकार देवर्षि कलानाथ शास्त्री ने विश्वास व्यक्त किया कि हिंदी के भी अच्छे दिन आने वाले हैं। इस दौरान शास्त्री ने अंग्रेजी की कई खामियों और हिंदी की खासियत पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में राजस्थान बोर्ड की परीक्षाओं में हिंदी विषय में १०० फीसदी अंक प्राप्त करने वाले २६ विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।