फोटो: दैनिक भास्कर के एक पेड एक जिंदगी अभियान के तहत मेनका गांधी ने होटल क्लॉर्क आमेर में पौधारोपण किया।
जयपुर। केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि हिंदूस्तान में रोजाना तीन से छह हाथी मर रहे है। जिस तरह से सर्कस और जू में हाथी पूरी तरह से बैन हो चुके हैं। वैसे ही मंदिरों से हाथी बैन किए जाने चाहिए। मेनका गांधी रविवार को फियापो के तत्वावधान में आयोजित इंडिया फॉर एनीमल्स-2014 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रही थी।
मेनका गांधी ने कहा कि एनिमल वेलफेयर कॉर्पोरेट्स की सीएसआर एक्टीविटीज का हिस्सा बन चुका है। कॉर्पोरेट्स को एलिफेंट रेस्कयू की पहल करनी चाहिए। एक हाथी पर पचास हजार प्रतिमाह का खर्च आता है। कॉर्पोरेट्स को हाथियों को अडोप्ट करना चाहिए। बारह साल पहले राजस्थान में हाथियों की दुर्दशा सुधारने के लिए हाथी गांव बनाने के लिए ग्रांट दी थी। जयपुर में हाथी गांव तो बन गया, लेकिन अभी तक हाथियों की दुर्दशा नहीं सुधर पा रही है।
मिडिल ईस्ट में दूधारू पशुओं की मांग सबसे ज्यादा
पशुवध के प्रति गुस्सा जाहिर करते हुए मेनका ने कहा कि पशुवध से आने वाला पैसा आतंकवाद के काम आ रहा है। मिडिल ईस्ट में हिंदूस्तान के दूधारू पशुओं की मांग सबसे ज्यादा है। इन देशों में सप्लाई के लिए हमारे देश में सबसे ज्यादा पशुओं का वध किया जा रहा है। यह बहुत ही शर्मनाक है। वे कांफ्रेंस में मंत्री की हैसियत से नहीं आई है। वे एनिमल वेलफेयर और प्रोटेक्शन अभियान से पिछले 35 साल से जुड़ी हुई है आज वे टीचर की हैसियत से यहां आई है। इस अभियान को पचास साल की उम्र से ज्यादा के लोग चला रहे हैं। युवाओं की कमी है। यह अभियान कुत्ते-बिल्ली बचाने तक सिमटकर नहीं रहना चाहिए। जंगली जानवरों को बचाने के लिए आगे आना चाहिए।
फोटो: मनोज श्रेष्ठ एवं प्रणिता भारद्वाज
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