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7 वर्ष पहले
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राजस्‍थान विधानसभा (फाइल फोटो)।
जयपुर। राज्य विधानसभा के तीसरे और संक्षिप्‍त सत्र में बुधवार को राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के गठन के लिए लाए गए संविधान संशोधन विधेयक पर अनुमोदन के साथ ही विधेयक पर अनुमोदन करने वाला राजस्‍थान देश का पहला राज्‍य बन गया। भाजपा विधायक दल के सचेतक राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि इस विधेयक के अनुमोदन के लिए ही विधानसभा का यह विशेष सत्र बुलाया गया। संसद के बाद इस विधेयक पर मंजूरी देने वाला राजस्‍थान देश का पहला राज्‍य बन गया है।
उल्‍लेखनीय है कि हाल के दिनों में न्यायपालिका में उठे भ्रष्टाचार के मुद्दे और नियुक्ति को लेकर पुरानी कॉलेजियम सिस्टम में खामियों के आरोप के बाद इस विधेयक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
संसद में मिल चुकी है मंजूरी:
सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्टों में जजों की नियुक्ति में 20 साल पुरानी कॉलिजियम व्यवस्था को खत्म कर न्यायिक नियुक्ति आयोग के गठन का रास्ता साफ करने वाले ऐतिहासिक विधेयकों को संसद की मंजूरी मिल गई है।
संसद के बाद अब विधायिकाओं की मंजूरी की प्रक्रिया:
संसद में मंजूरी के बाद अब संविधान संशोधन विधेयक को अब सभी राज्यों को भेजा जाएगा और राज्य विधायिकाओं में से 50 फीसद से इस पर मंजूरी लेनी पड़ेगी। यह प्रक्रिया आठ महीने तक चल सकती है। राज्यों से मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। संविधान संशोधन विधेयक के जरिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल जाएगा।
विधेयक में क्‍या है न्‍यायिक नियुक्ति प्रावधान ?
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक के तहत सुप्रीम कोर्ट व देश के अन्य 24 हाई कोर्टों के जजों की नियुक्ति की जाएगी। आयोग में भारत के प्रधान जज, सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जज, कानून मंत्री और दो प्रख्यात व्यक्ति सदस्य होंगे।
इसलिए हो रही है आलोचना:
राष्‍ट्रीय न्‍यायिक नियुक्ति आयोग के गठन पर आलोचकों ने इसकी पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं मानी है। कुछ आलोचकों का का कहना है कि न्यायपालिका ने विधायिका और कार्यपालिका के अधिकारों में हस्तक्षेप किया है।
जजों का कॉलेजियम क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश समेत सुप्रीम कोर्ट के पांच जज होते हैं। वहीं उच्च न्यायालय का कॉलेजियम तीन मेम्बरों पर आधारित होता है। कालेजियम को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्तियां और तबादलों का अधिकार होता है। मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की 9-सदस्य संवैधानिक खंडपीठ ने 6 अक्तूबर 1993 को तय किया कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश का रूतबा कार्यपालिका से ऊपर है इसलिए जजों के स्थानांतरण और नियुक्तियां कॉलेजियम द्वारा की जाएंगी।