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प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को मिला ५० हजार तक जुर्माने का अधिकार

7 वर्ष पहले
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जयपुर। राज्य विधानसभा ने गुरुवार को दण्ड प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2014 ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन से प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को राजस्थान आबकारी अधिनियम के मामलों में सुनवाई के दौरान जुर्माना 50 हजार रुपए तक करने का अधिकार मिल जाएगा। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा।

संशोधन के उद्देश्य

विधेयक पर चर्चा का जबाव देते हुए कटारिया ने कहा कि इस संशोधन के जरिए राज्य सरकार दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 29 की उप-धारा (2) को जुर्माने की रकम को दस हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए करते हुए संशोधित कर रही है। इससे राज्य में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को ऐसे मामले पर विचार करने का अधिकार मिल सके।
संशोधन के कारण

कटारिया ने कहा कि इससे पूर्व राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 को 2007 में संशोधित किया गया था। इसके तहत बीस हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की जुर्माना लगाने की शक्ति को 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए किया जाना आवश्यक है, ताकि वह ऐसे मामलों की सुनवाई कर सके।
जनमत की जरूरत नहीं
इससे पहले सदन ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने एवं जनमत जानने के लिए परिचारित करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया। गौरतलब है कि पिछले अगस्त माह में ही उदयपुर संभाग में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के दौरान राज्य केबिनेट ने इस संशोधन को मंजूरी दी थी।