जयपुर। राजस्थान में सोलर पॉवर प्लांट लगाना कंपनियों के लिए बेहद आसान होने जा रहा है। नई सोलर पॉलिसी के तहत सरकार नए सोलर पॉवर प्लांट के लिए सैद्धांतिक मंजूरी से लेकर फाइनल एप्रूवल तक की समूची प्रक्रिया छह माह के भीतर निपटाने का प्रावधान करने जा रही है।
साथ ही, नई सोलर पॉलिसी में सोलर पॉवर प्लांट के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रोसेसिंग फीस की अधिकतम सीमा भी तय की जा रही है।
ऊर्जा विभाग के आला अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान सोलर एनर्जी पॉलिसी, 2014 के तहत राज्य में लगने वाले सभी सोलर पॉवर प्रोजेक्ट के मामले में राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन (आरआईसी) को नोडल एजेंसी बनाने का प्रावधान किया गया है।
प्लांट के रजिस्ट्रेशन से लेकर फाइनल एप्रूवल व जमीन आवंटन तक की समूची प्रक्रिया अब आरआरईसी के जरिए ही पूरी की जा सकेगी। स्टेट लेवल स्क्रीनिंग कमेटी (एसएलएससी) की सैद्धांतिक मंजूरी से लेकर स्टेट लेवल एम्पावर्ड कमेटी (एसएलईसी) के फाइनल एप्रूवल तक की समूची प्रक्रिया छह माह के भीतर पूरी कर दी जाएगी।
देरी पर लगेगा जुर्माना
सोलर पॉवर प्लांट स्थापित करने वाली कंपनियों को ज्यादा सुविधाएं देने के साथ ही लापरवाही बरतने वाली कंपनियों पर लगाम कसने का इंतजाम भी नई सोलर पॉवर पॉलिसी में किया जा रहा है।
इसके तहत, कंपनियों को एसएलईसी से फाइनल एप्रूवल मिलने के 24 माह के भीतर प्लांट लगाने का काम पूरा करना होगा और बिजली की आपूर्ति शुरू करनी होगी। प्लांट चालू करने में देरी करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी नई पॉलिसी में किया गया है। हालांकि, जुर्माने की राशि को पॉलिसी के ड्रॉफ्ट में प्रस्तावित दरों की तुलना में आधा कर दिया गया है।
कैबिनेट की मंजूरी जल्द
अधिकारियों के मुताबिक, नई सोलर पॉलिसी को जल्द ही कैबिनेट के एप्रूवल के लिए पेश किया जाएगा, जहां से मंजूरी मिलने के बाद इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।