प्रतिकात्मक तस्वीर।
जयपुर। राजस्थान शिक्षा संघ (सियाराम) ने शिक्षा में निजीकरण को बढ़ावा देने का विरोध करते हुए बड़ा मुद्दा उठाया है। संघ ने मांग की है कि सरकारी खजाने से वेतन प्राप्त करने वाले सरकारी कर्मचारी, अधिकारी और राजनेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूल में अनिवार्य रूप से पढ़ाने का आदेश जारी किया जाए। सरकार ने अगर ऐसा आदेश निकाल दिया तो सरकारी स्कूलों की दशा को सुधरने से कोई नहीं रोक सकता।
संघ के अध्यक्ष सियाराम शर्मा ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि साथ ही यह भी नियम बनाया जाए कि जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाएगा उसे चुनाव लड़ने के अयोग्य माना जाएगा। संघ ने सरकार के सामने इसी प्रकार की 11 मांगे रखी है जिनमें राज्य में शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की बात कही गई है। संघ ने शिक्षा में राजनैतिक हस्तक्षेप को भी विरोध किया है।
संघ के अतिरिक्त महामंत्री जगेश्वर प्रसाद शर्मा का कहना है कि सरकार ने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों को एनजीओ को सौंपना प्रारंभ कर दिया है। माध्यमिक स्कूल पीपीपी मॉडल पर निजी क्षेत्र में सौंपे जा रहे हैं। संगठन सरकार की इस नीति की भी विरोध करता है। उन्होंने कहा कि सोमवार को शिक्षामंत्री से होने वाली वार्ता में इन सब मुद्दों पर चर्चा होगी।