फोटो: अफगानिस्तान निवासी अब्दुल्ला(बाएं)
जयपुर। अफगानिस्तान निवासी अब्दुल्ला दो साल से लिगामेंट चोट की वजह से चल-फिर नहीं पा रहे थे। उन्होंने लिगामेंट सर्जरी पेशावर(पाकिस्तान) और अफगानिस्तान में भी करवाई। लेकिन फिर भी वे चलने-फिरने में असमर्थ थे। लेकिन जयपुर में उनको नया जीवन मिला और 2 साल बाद वो फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सके।
अब्दुला ने बताया कि दो साल से वो पाकिस्तान व अफगानिस्तान में इलाज के लिए भटक रहा था लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। इसी दौरान उनकी मुलाकात अफगानिस्तान की
किक्रेट बी टीम के खिलाडी इमरान से मुलाकात हुई। इमरान ने उन्हें जयपुर में लिगामेंट सर्जरी करवाने की सलाह दी। फिर वे अफगान से सर्जरी के लिए जयपुर आए।
पत्थर उठाते समय लगी चोट:
फोर्टिस एस्काॅट्र्स हॉस्पिटल के स्पोटर्स इंजरी एक्सपर्ट डॉ. विक्रम शर्मा ने बताया कि अब्दुल्ला को बांये घुटने में पत्थर उठाते वक्त चोट लगी थी। लिगामेंट टूटने के कारण उसका चलना-फिरना मुश्किल हो गया था।
अफगानिस्तान में लिगामेंट सर्जरी की जगह डाले स्क्रू:
अफगानिस्तान में सर्जरी करवाई। सर्जरी के छह महीने बाद भी वह रुटीन के काम नहीं कर सकता,क्योंकि यहां पर लिगामेंट सर्जरी के बजाय स्क्रू डाल दिए। रिलीफ नहीं मिलने पर वे पेशावर गए। वहां भी एक स्क्रू निकाल दिया, लेकिन लिगामेंट ठीक नहीं किया। वो पूरी तरह से बिस्तर पर आ गया।
क्रिकेटर से हुई मुलाकात, जयपुर पहुंचा हुई सर्जरी :
तभी अफगानी
किक्रेटर इमरान ने उन्हें जयपुर में सर्जरी करवाने की सलाह दी। जब वह सर्जरी के लिए जयपुर आया। उसके पास सर्जरी के डॉक्यूमेंट नहीं थे। स्क्रू होने के कारण एमआरआई नहीं हो सकती थी। अनुमान से ग्राफ्ट लगाकर सर्जरी की। स्क्रू निकाला गया। सर्जरी सफल रही।
रिवाइज्ड में ब्लीडिंग का खतरा तो लेजर टेक्निक से सर्जरी:
रिवाइज्ड सर्जरी में ब्लीडिंग की संभावना ज्यादा रहती है। लेजर टेक्निक का उपयोग किए जाने पर ब्लीडिंग कम हुई। रिकवरी जल्द हुई।
सबसे कम खर्चिला इलाज:
चिकित्सकों के अनुसार अफगानिस्तान और पाकिस्तान में इस तरह की सर्जरी का खर्च करीब तीन से चार लाख रुपए तक आंका जाता है। लेकिन इसकी तुलना में जयपुर में महज 60 हजार रुपए खर्च आता है।
फोटो: प्रणिता भारद्वाज