जयपुर। जयपुर में नी रिप्लेसमेंट के दौरान सैन्सर पोड का इस्तेमाल शुरू हो चुका है। रिप्लेसमेंट के समय घुटने पर ये सेन्सर पोड लगाने से एक्यूरेसी लेवल बढ़ जाता है। यूएसए की यह टेक्निक आई-असिस्ट नेविगेशनल सिस्टम है।
यह नेविगेशनल सिस्टम की थर्ड जनरेशन है। राजस्थान में इस टेक्निक से 62 वर्षीय बागो देवी का नी रिप्लेसमेंट किया गया है। जयपुर हॉस्पिटल के डायरेक्टर और ऑथर्पोडेक्सि सर्जन डा शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि इस सिस्टम का स्वयं का इन्टरनल नेटवर्क होता है।
इस नेटवर्क से सिस्टम कन्ट्रोलर के संपर्क में रहते हैं। चार सेन्सर पोड को रिप्लेसमेंट के इंस्ट्रूमेंट से जोड़ा जाता है। फिर अलाइनमेंट और बोनकट के डाटा फिक्स प्राप्त् किए जाते हैं। दस मिनट की इस प्रकिया से परफैक्ट अलाइन्मेंट मिलता है। सही अलाइन्मेट और टिशु बैलेन्सिंग होने से रिकवरी तेज होती है। घुटने की उम्र बढ़ जाती है। ये पोड डिस्पोजेबल होते हैं। सर्जरी टीम में डॉ. रवि शर्मा, डॉ. विजय शर्मा, डॉ.करण शर्मा भी थे।
फ्री मिलेगी यह टेक्निक
पिछले साल यूएसए में यह टेक्निक लॉन्च हुई थी। जयपुर में भी रिप्लेसमेंट इस टेक्निक से शुरू हो चुके हैं। ये डिस्पोजेबल पोड होते हैं। इनकी कीमत 45 हजार रुपए है। हॉस्पिटल को 22 साल पूरे हो चुके हैं। कोई भी पेशेंट इस टेक्निक से नी रिप्लेसमेंट करवाता है। इन पोड की कीमत नहीं ली जाएगी। सिर्फ सर्जरी का खर्च 50 हजार रुपए लिया जाएगा। अन्यथा सर्जरी का खर्च 95 हजार से एक लाख रुपए तक है।