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राज्य निर्वाचन आयोग ने लगाई सरकारी खर्चोँ पर लगाम

7 वर्ष पहले
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जयपुर। प्रत्याशियों के चुनाव खर्च की सीमा निर्धारित करने के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने नवंबर में प्रस्तावित नगर निकाय आम चुनाव में सरकारी खर्च की भी सीमा तय कर दी है।
खासकर वीडियोग्राफी, माइक, टैंट और बिजली व्यवस्था पर अत्यधिक खर्च को देखते हुए यह कदम उठाए गए हैं।
आयोग ने इस संबंध में समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर आयोग द्वारा निर्धारित सीलिंग की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने को भी कहा है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव सत्यप्रकाश बसवाला ने कहा है कि निकाय चुनाव में आदर्श आचार संहिता की पालना एवं स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की पालना में वीडियोग्राफी कराई जानी है।
आगामी निकाय चुनाव में की जाने वाली वीडियोग्राफी और टैंट, बैरिकेडिंग, माइक व बिजली व्यवस्था पर अत्यधिक खर्च को देखते हुए अब इनकी खर्च सीमा निर्धारित की जाती है।
वीडियोग्राफी की व्यवस्था
नामांकन से लेकर मतगणना तक अधिकारियों एवं निकायों में वीडियोग्राफर की संख्या भी निर्धारित की गई है। आयोग के अनुसार चुनाव पर्यवेक्षक, जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर और रिटर्निंग ऑफिसर को एक-एक वीडियोग्राफर की व्यवस्था रहेगी।
नगर निगम चुनाव क्षेत्र में तीन, नगर परिषद क्षेत्र में दो और नगर पालिका चुनाव क्षेत्र में एक वीडियोग्राफर तैनात किया जा सकेगा। हालांकि, मतदान दिवस पर संवेदनशील या अतिसंवेदनशील बूथों की वीडियोग्राफी के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी स्व-विवेक से अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। इसके लिए आयोग की अनुमति लेना जरूरी होगा।
जयपुर नगर निगम में खर्च सीमा 14 लाख
आयोग का कहना है कि टैंट, बैरिकेडिंग, बिजली व माइक व्यवस्था पर जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए 14 लाख रुपए की खर्च सीमा तय की है। नगर निगम कोटा व उदयपुर में सात-सात लाख, बीकानेर में पांच लाख, भरतपुर व उदयपुर नगर निगम में यह सीमा तीन-तीन लाख रुपए निर्धारित की गई है।
नगर परिषद अलवर के लिए दो लाख और अन्य नगर परिषदों में प्रत्येक के लिए खर्च सीमा सत्तर रुपए रहेगी। नगरपालिकाओं में इन मदों में ३५ हजार रुपए तक खर्च कर सकेंगे।