जयपुर। राजस्थान यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को कुलपति डॉ. देव स्वरूप के निर्देश पर आकस्मिक जांच कराई गई। इस जांच में करीब डेढ़ सौ ठेकाकर्मी कार्यस्थल से अनुपस्थित मिले। अब सवाल ये खड़ा हो गया है रेंडम चैकिंग में 20 प्रतिशत मौजूद नहीं मिले। संभवत: रोजाना ये ही हाल होगा। ऐसे में २० प्रतिशत कर्मचारियों का बगैर काम किए भुगतान उठ रहा है। सालाना करीब 90 लाख रुपए का बगैर काम के अतिरिक्त भुगतान उठ रहा है।
उधर, डेढ़ सौ कर्मचारियों की अनुपस्थित सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ देव स्वरूप ने संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी के पदाधिकारियों को अटेंडेंट रजिस्टर के साथ तलब कर लिया है। अब एजेंसी से रिपोर्ट लेकर इस मामले में यूनिवर्सिटी कार्रवाई की दिशा तय करेगी।
यूनिवर्सिटी के अफसरों की मिलीभगत के संभव नहीं:
माना जा रहा है कि ठेका कर्मियों की संख्या जो कागजों में अधिक और मौके पर कम पाई जाती है। ये सब बगैर यूनिवर्सिटी के अफसरों की मिलीभगत के संभव नहीं है। इस प्रकरण के बाद यूनिवर्सिटी के कई अफसर शक के दायरे में आ गए हैं। खासकर वो लोग जो ये कहते रहते थे कि कर्मचारियों की शॉर्टेज है।
यूनिवर्सिटी में ठेकाकर्मियों की स्थित:
| कुल कर्मचारी | 901 |
| डिपार्टमेंट व कॉलेजों में | 737 |
| सेल्फ फाइनेंस कोर्स में काम करने वाले | 174 |