केसरियो रंग तने लाग्यो ना गरबा...
समारोह में आई छोटी-छोटी बच्चियों ने भी गरबा खेला और अपनी मधुर मुस्कान के मोहपाश में हर किसी को बांध लिया।
जयपुर। शाम ढलते ही लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ समारोह स्थल पर डटे हैं। पहले दिन की ही तरह आज भी लोगों का उत्साह देखते ही बनता है। तरह-तरह के लिबास पहनकर लोग गरबा स्थल पर दाखिल होते चले जा रहे हैं। एक गरबा प्रेमी मयूर का रूप धारण करके तेजी से अंदर की ओर रहे हैं तो उनके ठीक पीछे एक जोड़ा राधा और कृष्ण का रूप रचाकर मोहिनी मुस्कान बिखेरता चला रहा है। हर ओर खुशी और उल्लास का माहौल है। अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव में रंगीन परिधानों में युवतियों और महिलाओं के समान ही युवक और पुरुष भी पीछे नहीं रहे। बचपन से लेकर पचपन तक सभी इस भक्ति के अनुष्ठान में अपने-अपने अंदाज में हिस्सा ले रहे हैं।
नन्ही परियों ने भी मचाई धूम
समारोह में एक तरफ वयस्क ताल से ताल मिला रहे थे तो दूसरी ओर सजी-धजी नन्ही परियां भी अपने-अपने ग्रुप में गरबा रास खेलती और इठलाती हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही थीं।
राजस्थानी रंग में रंगा गरबा
परिसरमें आज राजस्थानी परिधानों की खूब धूम रही। लहंगा-चुन्नी के साथ राजपूती पोशाक पहनकर भी कई महिलाओं के समूहों ने गरबा खेला।
रसना रसिकों ने छके व्यंजन
पानीपुरी हो या छोले कुलचे, पाव भाजी हो या ठंडक देने वाली कुल्फी। महोत्सव में रसना रसिकों का भी अपना अलग ही आलम था। बीकानेरी रबड़ी के छत्ते की चुस्कियों के साथ तिरछी नजर से गरबा देखने का अंदाज निराला था। बच्चों को दूध-जलेबी का स्वाद खूब भाया, महिलाएं खास तौर पर गुजरात की फर सान का स्वाद लेती दिख रही थीं।