जयपुर। सरकार की आपत्ति के बावजूद जलदाय विभाग के इंजीनियरों ने 260 स्टोर मुंशी बना दिए। अब इन स्टोर मुंशियों को हटाने की तैयारी की जा रही है। विभाग के सूत्रों का कहना है कि स्टोर मुंशी बनाने के लिए कई कर्मचारियों ने इंजीनियरों से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से अनुभव प्रमाण पत्र बनवा लिए तथा फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज लगा कर प्रमोशन ले लिया।
जलदाय विभाग ने 2007 में शैक्षणिक योग्यता व मंत्रालयिक संवर्ग का काम करने वाले हेल्परों को स्टोर मुंशी पद पर प्रमोशन दे दिया था। इस पर वित्त विभाग ने आपत्ति करते हुए रोक लगाने के लिए लिखा था। इसके बावजूद जलदाय विभाग ने इंजीनियरों ने सात साल तक इसकी फाइल को दबाए रखा। जलदायकर्मियों का आरोप है कि स्टोर मुंशी बनाने के लिए इंजीनियर, कार्मिक अधिकारियों व कर्मचारी नेताओं ने बड़ी रकम ली है।
वित्त विभाग ने ये जताई थी आपत्ति :
वित्त विभाग ने जलदाय विभाग को पत्र लिख कर विभाग की राय लिए बिना ही हेल्पर की पे स्केल ग्रेड- दो व तीन से स्टोर मुंशी की पे स्केल ग्रेड-छह देने पर आपत्ति जताई थी। वित्त विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के कर्नाटक बनाम उमादेवी केस का भी जिक्र किया। वित्त विभाग की दलील है कि इससे विभाग पर वित्तीय भार बढ़ा है तथा वर्कचार्ज स्टोर मुंशियों को स्टोर मुंशी बनाना तकनीकी रूप से गलत है।