प्रतीकात्मक फोटो।
जयपुर। शहर में कैब रामभरोसे चल रही हैं। आरटीओ और परिवहन विभाग में इनका डाटा और रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। यही नहीं आरटीओ में कैब रजिस्ट्रेशन का प्रावधान भी नहीं है।
दिसंबर में नई सरकार आने पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने परिवहन विभाग ने रेडियो टैक्सियों के संचालन के लिए पॉलिसी बनाने का प्रजेंटेशन देकर वाहवाही लूट ली, लेकिन एक साल बाद भी विभाग ने प्रस्ताव तैयार नहीं किया। यहां तक की प्रजेंटेशन को अधिकारियों ने फाइलों में दबा दिया।
शहर में चार साल में एक से बढ़कर छह कंपनियां कैब का संचालन कर रही हैं। बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही कैब कंपनियों पर भी आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ने तीन साल में कोई कार्रवाई नहीं की।
दिल्ली दुष्कर्म के बाद भी नहीं चेता विभाग
दिल्ली में कैब में महिला के साथ हुए दुष्कर्म के बाद भी परिवहन विभाग नहीं चेता है। विभाग ने कैब्स की जांच के लिए आरटीओ-डीटीओ को निर्देश नहीं दिए हैं। ये कैब्स शहर में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही हैं।
यहां पर बनी हुई है रजिस्ट्रेशन के लिए स्कीम
रेडियो टैक्सी (कैब) के रजिस्ट्रेशन के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बैंगलोर में रेडियो टैक्सी (कैब) के नाम से स्कीम बनी हुई है। इसके तहत कंपनी और सोसायटी को प्रादेशिक परिवहन कार्यालय में रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके बाद ही शहर में रेडियो टैक्सी का संचालन कर सकता है। नियम शर्तों के उल्लंघन करने पर रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाता है।
शहर में 6 कंपनी 350 करों का कर रही संचालन
शहर में करीब 6 कंपनी कैब का संचालन कर रही है। इनके माध्यम से करीब 350 कारों का संचालन हो रहा है। इसमें से 2 कंपनियों के अतिरिक्त किसी कंपनी की कारों पर जीपीएस सिस्टम नहीं लगा हुआ।
जैसी टैक्सी वाहनों पर कार्रवाई होती है, वैसी कार्रवाई इन पर करते हैं
आरटीओ वी.पी. सिंह के अनुसार शहर में कितनी कैब संचालन हो रही है इसका आंकड़ा आरटीओ में उपलब्ध नहीं है। रजिस्ट्रेशन के लिए भी प्रावधान एवं स्कीम नहीं बनी हुई है। जैसे टैक्सी वाहनों पर कार्रवाई होती है, वैसी कार्रवाई इन पर करते हैं।