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चीन की तर्ज पर बदला जा सकता है योजना आयोग का स्वरूप

7 वर्ष पहले
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जयपुर। प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. योगेन्द्र के अलघ ने कहा है कि चीन में जिस तरह राज्य योजना समितियों को राष्ट्रीय आर्थिक एवं सामाजिक विकास कमीशन के रूप में बदला गया है। वैसे ही इंडिया में वर्तमान योजना आयोग को ऐसी प्रभावी संस्था में बदला जा सकता है। जिस संस्था के पास ऊर्जा, जल और जनसांख्यिकी आदि मुद्दों पर दीर्घकालिक योजना हो।
प्रो. अलघ बुधवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में सातवें प्रो. राज कृष्णा स्मृति व्याख्यान में 'दी अनईजी केस अगेंस्ट प्लानिंग' विषय पर लेक्चर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि योजना आयोग का विघटन करने के लिए लंबी चर्चा के बाद मजबूत विकल्प देखना चाहिए।
संसाधनों का वितरण योजना आयोग का मुख्य कार्य है। राज्य और केंद्र से योजना बजट के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं, क्योंकि अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट के आकार को प्रक्रिया में ले रहे हैं।
प्रो. अलघ ने योजनाओं से जन सांख्यिकी का लाभ देने के लिए अच्छे स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान देने की जरुरत बताई। महिलाओं को विकास दर में सहायक बनाने के लिए कृषि, विविधिकरण, शहरी-ग्रामीण पलायन और रोजगार जैसे विषयों पर संस्थागत बदलाव लाकर प्रभावी योजना बनाने की आवश्यकता भी जताई है।
अध्यक्षीय व्याख्यान में राज्य योजना आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन एवं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रो.वीएस व्यास ने कहा कि देश की वर्तमान समस्याओं से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं की आवश्यकता है। डिपार्टमेंट के निदेशक प्रो. विजय वीर सिंह ने अर्थशास्त्र विभाग के बारे में जानकारी दी।