जयपुर। हाईकोर्ट ने प्रदेश की जेलों में बंदियों के रहवास, स्वास्थ्य, शिक्षा व दैनिक भुगतान सहित अन्य आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने के संबंध में सरकार से पूछा है कि वह इसके लिए क्या कर रही है। साथ ही एसीएस होम से इस संबंध में 23 जनवरी तक शपथ पत्र पेश करने के लिए कहा है।
न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व निशा गुप्ता की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश बुधवार को जेलों में
मोबाइल फोन मिलने पर हाईकोर्ट द्वारा लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले मे सुनवाई करते हुए दिया।
अदालत ने कहा कि जेलों में बंदियों की स्थिति देखते हुए सरकार को कहा कि वह जेल मैन्यूअल, पैरोल रूल व प्रिजनर रूल्स में संशोधन क्यों नहीं करती। सुनवाई के दौरान अदालती आदेश के पालन में सात संभागों जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा व भरतपुर के जिला व सेशन न्यायाधीशों की ओर से पेश रिपोर्ट में कहा कि जेलों में बंदियों की स्थिति खराब है और उन्हें न तो सही खाना मिल रहा है और न ही रहवास।
इसके अलावा उन्हें पारिश्रमिक भी उचित नहीं दिया जा रहा। गौरतलब है कि अदालत ने मार्च 2014 के अंतरिम आदेश से सातों संभागों के जिला व सेशन न्यायाधीशों सहित अन्य न्यायिक अफसरों को जेलों का औचक निरीक्षण कर जेलों में बंदियों के खाने, चिकित्सा, शिक्षा गतिविधियों, व्यावसायिक गतिविधियों, जेलों के आधारभूत विकास व बंदियों व उनके परिजनों के कल्याण के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी।
इन बिन्दुओं पर मांगी थी रिपोर्ट:
हाईकोर्ट जेलों में टॉयलेट्स व बाथरूम की सुविधा, कचरा हटाने व सफाई की व्यवस्था, खाने की गुणवत्ता, बंदियों के स्वास्थ्य की जांच व इलाज की स्थिति, आंखों व दांतों का उपचार, एबुलेंस की व्यवस्था का ब्यौरा मांगा।
साथ ही पूछा था कि पिछले दस सालों में कितने बंदियों की मौत हुई व उसका क्या कारण रहा। इसके अलावा प्रौढ़ शिक्षा कक्षाओं की व्यवस्था, औद्योगिक प्रशिक्षण व दूरस्थ शिक्षा की सुविधा का ब्यौरा, व्यावसायिक गतिविधियों व दैनिक भुगतान, जेलों में बैरकों की संख्या व उनमें रखने वाले बंदियों की संख्या, बैरकों में सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा, जेल भवनों के रख-रखाव व मरम्मत की स्थिति, स्टॉफ का ब्यौरा भी रिपोर्ट में पूछा था। साथ ही बंदियों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी भी मांगी थी।