पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • कैलास्या से कैसे बना कैलाश, जानिए एक असहाय युवक की कहानी

कैलास्या से कैसे बना कैलाश, जानिए एक असहाय युवक की कहानी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जयपुर। चित्तौडग़ढ़ जिले की रावतभाटा तहसील के बोराव गांव निवासी कैलास्या जो शारीरिक रूप से नि:शक्त के साथ चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण बेरोजगार था। उसे इस कारण पूरा गांव उसे कैलास्या-कैलास्या कह कर ही सम्बोधित करता था। शारीरिक रूप से विशेष योग्यजन कैलाश को जानकारी मिली कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ओर श्री सांवलिया मन्दिर मण्डल द्वारा ६ सितम्बर, २०१४ को ट्राईसाईकिल प्रदान की जाएगी और स्वरोजगार के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं में ऋण देने की प्रक्रिया है। यह समाचार मिलते ही कैलाश सुबह-सुबह ही सांवलिया जी के मेले के दर्शन एवं ट्राईसाईकिल लेने पहुंच गया। उसने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क कर आवेदन प्राप्त कर भरकर पूरा किया फिर उसका चयन ट्राईसाईकिल के लिए कर लिया गया तो जैसे उसे भगवान ने मेले में अनूठा प्रसाद दिया हो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उससे जिला कलक्टर वेद प्रकाश ने उसे अन्य योजनाओं के लाभ के बारे में पूछा तो उसने कहा कि आपको पेंशन मिल रही है। जिला कलक्टर ने पूछा कि कामकाज करना चाहते हो तो कैलाश ने काम-काज के लिए दुकान लगाने के लिए राशि नहीं होने की बात कही। जिला कलक्टर ने मौके पर उपस्थित सहायक निदेशक से स्वरोजगार ऋण उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में निर्देश दिए। विभाग द्वारा मौके पर ही कैलाश को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का आवेदन तैयार करवा कर ऋण एंव अनुदान उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त किया तो कैलाश की खुशी के चार-चांद लग गये।
विभाग द्वारा कैलाश का ऋण आवेदन स्वीकृति हेतु बड़ौदा राजस्थान ग्रामीण बैंक शाखा बोराव को भेजा जिन्होने कैलाश को निराश नहीं किया और राशि एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर विभाग को अनुदान स्वीकृति हेतु भिजवाया।
विभाग द्वारा भी त्वरित कार्यवाही करते हुए कैलाश के ऋण की अनुदान राशि ५०००० रुपये बैंक को भिजवायी। मुख्यमंत्री स्वरोजगार ऋण अनुदान योजना से स्वीकृत ऋण से आज कैलाश ने किराना की दुकान बोराव में लगा ली है। जिससे वह नियमित रूप से जीविकोपार्जन कर रहा है और गांव वालों के समक्ष कैलाश विशेष योग्यजन होने के बावजूद काम करके जीवन यापन कर रहा है। जो उसकी हिम्मत का एक उदाहरण है। कैलाश का कहना है कि अब गांव वाले भी उसे सम्मान से कैलास्या की जगह कैलाश जी, कैलाश जी कहते हैं। जिससे गांव में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ी है। वह अब अन्य लोगों को भी राज्य सरकार की योजनाओं के लिए प्रेरित करता है।